देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की हकीकत उसके नलों से निकलने वाले पानी ने बयां कर दी है। आज इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नगर निगम और राज्य सरकार की व्यवस्थाओं सवाल खड़े किए। कांग्रेस द्वारा कराए गए एक वैज्ञानिक ‘जल सर्वे’ और लैब रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर की जनता को नलों के माध्यम से पानी नहीं, बल्कि ‘धीमा जहर’ परोसा जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने बताया कि कांग्रेस ने इंदौर के 7 विधानसभा क्षेत्रों के 29 वार्डों से 240 पानी के नमूने एकत्र किए थे। ‘यूनिग्लोब एनालिटिका’ की लैब रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जांचे गए पानी के 98% नमूने गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह फेल पाए गए हैं। पानी में ‘ई-कोलाई’ (E. coli) और ‘कोलीफॉर्म’ बैक्टीरिया की भारी मात्रा की पुष्टि हुई है, जो सीधे तौर पर पीने के पानी की पाइपलाइनों में सीवरेज का गंदा पानी मिलने का प्रमाण है। 36 मौतों का जिम्मेदार कौन? जीतू पटवारी ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि शहर में दूषित पानी पीने से अब तक 36 मासूम नागरिकों की असामयिक मौत हो चुकी है। भागीरथपुरा सहित कई क्षेत्रों में फैली इस त्रासदी के बावजूद नगर निगम प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमृत योजना और ड्रेनेज सुधार के नाम पर खर्च किए गए 7,000 करोड़ रुपए का बजट विकास के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। कांग्रेस ने प्रशासन को दिया अल्टीमेटम प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और नगर निगम के सामने 5 सूत्रीय मांगें रखते हुए अल्टीमेटम दिया है। सड़क पर उतरने की चेतावनी जीतू पटवारी ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा, “इंदौर की जनता धैर्य के साथ अपने हक का इंतजार कर रही है, लेकिन अब हम मौतों का सिलसिला बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि समय रहते इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरेगी और इंदौर नगर निगम मुख्यालय का घेराव करेगी।” क्या इंदौर की ‘स्वच्छता रैंकिंग’ सिर्फ कागजों तक सीमित है? या प्रशासन जानबूझकर इंदौर को बीमारियों की भेंट चढ़ा रहा है? यह अब शहर का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। संसद में खामोशी पर जीतू पटवारी का प्रहार पटरवारी ने सरकार की उदासीनता पर भी गंभीर सवाल उठाए। पटवारी ने कहा, “यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि जिस शहर ने 36 मासूमों को दूषित पानी के कारण खो दिया, उस पर संसद (लोकसभा) में एक शब्द तक नहीं बोला गया। क्या केंद्र सरकार और इंदौर के सांसद को इन मौतों की कोई परवाह नहीं है? सदन में चुप्पी यह दर्शाती है कि सत्ता पक्ष इस मानवीय त्रासदी के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है।” उन्होंने इसे जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ बताया।
