कटनी जिला उपभोक्ता फोरम ने रेल यात्रा के दौरान चूहों के सामान खराब करने के मामले में रेलवे पर 15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने इसे ‘सेवा में घोर लापरवाही’ करार देते हुए यात्री को हुई मानसिक और आर्थिक परेशानी के लिए रेलवे प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। यह मामला कटनी की आदर्श कॉलोनी निवासी विपिन दुबे की 3-एसी (3 AC) कोच में की गई यात्रा से जुड़ा है। 3-एसी कोच में चूहों ने काटा कीमती सामान विपिन दुबे ने 17 फरवरी 2020 को कटनी से कल्याण (मुंबई) तक की यात्रा के लिए आरक्षण कराया था। सफर के दौरान उन्होंने अपना बैग सीट के नीचे सुरक्षित रखा था, जिसे चूहों ने बुरी तरह कुतर दिया। इससे बैग में रखे कीमती कपड़े और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह खराब हो गए। पीड़ित ने मौके पर टीटीई और उच्च अधिकारियों से लिखित शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। प्रीमियम किराया लेकर गंदगी और चूहे मिलना सेवा में कमी सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने रेलवे की दलीलों को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की। आयोग ने कहा कि यात्रियों से प्रीमियम किराया वसूलने के बाद उन्हें सुरक्षित और स्वच्छ सफर देना रेलवे का कानूनी दायित्व है। वीआईपी या एसी क्लास में चूहों की मौजूदगी रेलवे की लचर व्यवस्था को दर्शाती है। आवेदक की ओर से अधिवक्ता मौसुफ बिट्टू और प्रमोद तिवारी ने पैरवी कर सिद्ध किया कि यह उपभोक्ता कानून का सीधा उल्लंघन है। तीन अलग-अलग मदों में 15 हजार रुपये का हर्जाना आयोग ने 22 मई 2026 को दिए अपने आदेश में रेलवे को कुल 15,000 रुपए भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसमें क्षतिग्रस्त सामान और कपड़ों के मुआवजे के रूप में 5,000 रुपए, मानसिक व शारीरिक परेशानी के लिए 5,000 रुपए और कानूनी खर्च के तौर पर 5,000 रुपए शामिल हैं। यह फैसला रेल उपभोक्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे सफाई व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
