धार से अमझेरा तक बन रही इंदौर-दाहोद रेल लाइन के 229 करोड़ रुपये के रेल प्रोजेक्ट में भुगतान विवाद गहरा गया है। लगभग 25 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट का काम तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी 10% भी पूरा नहीं हो पाया है। मुख्य ठेकेदार जीकेसी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर पेटी कॉन्ट्रैक्टरों, वेंडरों और ट्रांसपोर्टरों के करोड़ों रुपये रोकने का आरोप है। भुगतान न मिलने से नाराज लोग धार के तिरला स्थित कंपनी के प्लांट पर धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने मशीनरी और सामग्री को बाहर ले जाने से रोक दिया है। जानकारी के अनुसार, जीकेसी प्रोजेक्ट्स ने अधिकांश काम पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर दिया था। एजेंसी बदलने से बढ़ा विवाद
शुरुआत में यह जिम्मेदारी सनवर्स रेल टेक बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई थी, जिसने स्थानीय स्तर पर काम शुरू कराया। समय पर भुगतान न होने के कारण बकाया बढ़ता गया। बाद में कंपनी ने एजेंसी बदलकर काम कोंडर कंपनी को दे दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। करोड़ों रुपये का बकाया
भजनलाल इंटरप्राइजेज के ओम प्रकाश बिश्नोई ने बताया कि उनका अकेले 80 से 85 लाख रुपये फंसा है, जबकि कुल बकाया 3 से 4 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बिश्नोई का आरोप है कि पिछले छह महीने से भुगतान बंद है और पैसे मांगने पर धमकियां दी जा रही हैं। मजदूरी और किस्तों पर असर
भुगतान रुकने से मशीन मालिकों की बैंक किस्तें बाउंस हो रही हैं और मजदूरों को मजदूरी देने में भी दिक्कत आ रही है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब नई एजेंसी प्लांट को शिफ्ट करने की तैयारी में थी। यह सूचना मिलते ही वेंडरों ने प्लांट के बाहर अपने वाहन खड़े कर दिए और स्पष्ट कर दिया कि भुगतान के बिना कोई सामग्री बाहर नहीं जाने देंगे। उनका कहना है कि प्लांट में अभी 2 से 2.5 करोड़ रुपये का माल मौजूद है, जिससे उन्हें भुगतान मिलने की उम्मीद है। नई एजेंसी ने पुराने भुगतान से किया किनारा
वहीं, कोंडर कंपनी के पार्टनर भागचंद का कहना है कि पुराने भुगतान से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण में देरी सहित अन्य कारणों से प्रोजेक्ट पहले ही पीछे चल रहा है, जिसके लिए सरकार से एक साल का एक्सटेंशन मांगा गया है। देखें मौके की तस्वीरें
