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10×26 के बाड़े में भरे गए 205 मवेशी:बैठने तक की जगह नहीं, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा शपथपत्र, 2 महीने पहले हुआ था शुभारंभ

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के लाखासार गौधाम में मवेशियों की खराब हालत पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दैनिक भास्कर ने 3 मई को खबर प्रकाशित की थी कि यहां एक छोटे से शेड में 205 गायों को ठूंसकर रखा गया है, जहां उनके बैठने तक की सही व्यवस्था नहीं है। जिसके बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की है। कोर्ट ने पशुपालन विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ जवाब देने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि ये वहीं गौधाम है, जिसका शुभारंभ 2 महीने पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया था। गायों को ठूसकर रखे जाने का मामला सामने आने के बाद सोमवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई की। इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। CM ने 14 मार्च को किया था शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 14 मार्च को बिलासपुर से करीब 18 किलोमीटर दूर तखतपुर ब्लॉक के लाखासार में 25 एकड़ में बने गौधाम का शुभारंभ किया था। इस दौरान उन्होंने गौधाम में प्रशिक्षण भवन के निर्माण के लिए 25 लाख रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की थी। साथ ही एक काऊ कैचर और एक पशु एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की भी बात कही थी, ताकि क्षेत्र में गौसंरक्षण और स्थानीय विकास कार्यों को मजबूती मिल सके। दैनिक भास्कर ने अव्यवस्थाओं को किया था उजागर 3 मई को दैनिक भास्कर ने गौधाम में किए जा रहे सरकारी दावों की हकीकत उजागर की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि जिस गौधाम का शुभारंभ सीएम साय ने किया था, वहां अव्यवस्थाओं का अंबार है। यहां महज 10×26 फीट के छोटे से शेड में 205 गायों को ठूंसकर रखा गया है, जहां उनके बैठने तक की जगह नहीं है। वेटनरी डॉक्टरों के अनुसार एक मवेशी के लिए कम से कम 30-40 वर्गफुट ढंका हुआ स्थान जरूरी होता है, लेकिन यहां कैपेसिटी से कई गुना ज्यादा पशु होने के कारण उनका दम घुटने और वायरस फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ है। चारा-पानी का भी संकट, चौकीदार के भरोसे गौधाम गौधाम में केवल जगह की ही कमी नहीं है, बल्कि चारे और पानी का भी गंभीर संकट बना हुआ है। पशुओं को चारा देने के लिए बना कोटना पूरी तरह खाली मिला। चौकीदार के अनुसार, 200 से अधिक मवेशियों के लिए दिन भर में सिर्फ 25–30 बोझा पैरा ही उपलब्ध हो पाता है, जो बेहद कम है। इसके अलावा 25 एकड़ के इस बड़े परिसर की देखरेख की जिम्मेदारी सिर्फ एक चौकीदार पर है, जिसे 12 हजार रुपए मासिक वेतन पर 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। इतना ही नहीं, दूध के उपयोग को लेकर भी अनियमितता सामने आई है। बताया गया है कि नवजात बछड़ों को उनकी मां से अलग रखा जाता है, जो पशु कल्याण के लिहाज से चिंताजनक है। सड़कों पर मवेशियों का झूंड बिलासपुर, सकरी और तखतपुर रोड के बीच बने इस गौधाम का मुख्य उद्देश्य सड़कों को मवेशी मुक्त करना है। सकरी से लाखासार और तखतपुर रोड पर कई जगहों पर मवेशी सड़क पर बैठे दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गौधाम में केवल दान में दिए गए मवेशियों को ही रखा जा रहा है, जबकि आवारा घूमने वाले स्थानीय पशुओं को उनके मालिक वहां भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। अब अगली सुनवाई 14 मई को होगी। बिलासपुर में मवेशियों की अव्यवस्था से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

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