बालाघाट जिले के आदिवासी अंचल अडोरी और मछुरदा पंचायत के गांवों में फैली महामारी से बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों के बाद, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर बीमार परिवारों को मिल रही स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उनके साथ जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष और विधायक संजय उइके, विधायक मधु भगत, अनुभा मुंजारे और विवेक पटेल भी मौजूद रहे। मृत बच्चों के परिजनों को आर्थिक मदद सिंघार ने ग्रामीणों से गांव में रोजगार, मजदूरी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर चर्चा की। उन्होंने कुछ परिवारों को व्यक्तिगत रूप से आर्थिक सहायता भी प्रदान की। इसके अतिरिक्त, विधायक दल ने घोषणा की कि सभी मृतक बच्चों के परिवारों को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। सरकार छिपा रहे आंकड़े नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि गांव में फैली महामारी से 19 बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार जिम्मेदारी नहीं ले रही है और प्रशासन मौतों के आंकड़े छिपा रहा है। उन्होंने कहा कि लापरवाही के कारण कई माताओं की कोख सूनी हो गई है। सिंघार ने यह भी कहा कि जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के अधिकार छीने जा रहे हैं, उन्हें बांस काटने की अनुमति नहीं मिल रही है। उन्होंने पीएम आवास योजना के तहत घरों के अधूरे निर्माण और हितग्राहियों को केवल 40 हजार रुपये मिलने का मुद्दा उठाया, आरोप लगाया कि बाकी पैसे ठेकेदार खा गए। उन्होंने मच्छरदानी वितरण में अनियमितता और बच्चों को दो-चार माह में एक बार पोषण आहार मिलने की बात भी कही। तिरंगा फहराने से पहले बच्चों के बारे में सोचें सीएम सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपील की कि वे तिरंगा फहराने से पहले बालाघाट के बच्चों के बारे में सोचें। उन्होंने सरकार से मृतकों के परिवारों को 10 से 20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने, संवेदनशीलता दिखाने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने आदिवासियों को शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने पर भी जोर दिया, क्योंकि वे दूषित जल पीने को मजबूर हैं। नल जल सेवा बंद पड़ी है, घर-घर मोदी का नारा देने वाले ना मोदी है ना पानी है। इस मामले में गंभीरता से सरकार और प्रशासन विचार करेगी। आगामी सत्र में हम इस मुद्दे को उठाएंगे।
