अगले साल फरवरी में होने वाली जनगणना 2027 की प्रश्नावली केंद्र सरकार ने जारी कर दी है। मकानों की गणना के लिए 33 सवाल पूछने का निर्णय लिया गया था जबकि जनगणना में 40 सवाल हर परिवार के मुखिया से पूछे जाएंगे। फरवरी में लोगों के घर-घर जाकर प्रगणक एससी-एसटी की जाति पूछने के साथ लोगों से उनकी जाति पूछेंगे। हालांकि इसमें ओबीसी को लेकर कोई कॉलम नहीं है। प्रगणक को यह भी बताना होगा कि परिवार का मुख्य किस वाहन से आता-जाता है। यह भी पूछा जाएगा कि कोविड का टीका कहां लगवाया था और परिवार के मुखिया के पास कितने बैंक खाते हैं। फरवरी में होने वाली जनगणना के लिए जो सवाल तय किए गए हैं, वह इसके पहले 2011 में हुई जनगणना में पूछे गए सवालों से अधिक हैं। गृह मंत्रालय के भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी अधिसूचना में जनगणना अधिकारियों को परिवारों से विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत जानकारियां जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। भारत के राजपत्र में 14 अगस्त 2026 को प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 8 की उपधारा (1) के अंतर्गत अधिकारियों को स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों से इन्हीं सवालों के जवाब लेने होंगे। शिक्षा, रोजगार जैसी जानकारी भी लेंगे जनगणना 2027 में जुटाई जाने वाली जानकारी के दौरान प्रगणक और सुपरवाइजर केवल जनसंख्या की गिनती तक सीमित नहीं रहेंगे। इसमें शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, प्रवास, भाषा, सामाजिक वर्ग, डिजिटल साक्षरता और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी। खास तौर पर मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित जानकारी भी सवालों की सूची में शामिल है। हालांकि अधिसूचना में मोबाइल और आधार जैसी जानकारी के साथ “यदि उपलब्ध हो” का उल्लेख किया गया है। सरकार के किस काम आएगा डेटा इस जानकारी से देश में जनसंख्या की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और बुनियादी सेवाओं की जरूरत का आकलन करने में मदद मिलेगी। भविष्य में सरकारी योजनाओं और नीतियों की योजना बनाने के लिए जनगणना का यह आंकड़ा महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
