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शिवराज का VIDEO, लोग बोले- मामा वापस आ जाओ:लाड़ली बहनों के लिए मोहन भैया का गाना, पूड़ी-सब्जी पर टूट पड़े भाजपा कार्यकर्ता

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। एमपी में कम नहीं हुआ शिवराज मामा का क्रेज
मामा जी यानी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भले ही दिल्ली शिफ्ट कर दिए गए हों, लेकिन मध्य प्रदेश में उनका क्रेज अब भी बरकरार है। उनका एक वीडियो सामने आया है। जिसमें लोग उन पर जमकर प्यार लुटाते नजर आए। दरअसल, हाल ही में शिवराज सिंह चौहान जब भोपाल की सड़कों से गुजरे तो रास्तेभर हाथ जोड़कर और हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करते रहे। इस दौरान लोगों ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाने की इच्छा जाहिर कर दी। एक महिला ने कहा- मामा जी, आप वापस आ जाओ, आपकी बहुत जरूरत है। वहीं, एक शख्स ने कहा- पब्लिक आपको बहुत याद करती है। इस पर शिवराज सिंह ने भी जवाब दिया- मैं भी याद करता हूं। एक युवक ने तो साफ कह दिया- मामा, मजा नहीं आ रहा… आपको वापस आना पड़ेगा। वहीं, एक अन्य युवक ने सीधे कह दिया- मामा जी, सीएम बन जाओ आप। वैसे, शिवराज सिंह चौहान के लिए ऐसे सीन नए नहीं हैं। वे जब भी मध्य प्रदेश आते हैं, अक्सर ऐसा ही माहौल बन जाता है। अब खरी बात ये है कि जनता का प्यार अपनी जगह है, लेकिन मामा जी ये बात बखूबी जानते हैं कि एमपी रिटर्न का टिकट उनके हाथ में नहीं है। लाड़ली बहनों के लिए मोहन भैया ने गाया गाना
इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यानी मोहन भैया भी मामा की राह पर बढ़ते नजर आए। मैहर में उन्होंने लाड़ली बहना योजना के तहत बहनों के खातों में राशि ट्रांसफर की और मंच से उन पर खूब लाड़ भी लड़ाया। सीएम ने मंच से लाड़ली बहनों के लिए जयकारा लगवाया। फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। फिर उनके लिए गाना भी गाया- ‘फूलों का तारों का, सबका कहना है… एक हजारों में मेरी बहना है।’ मोहन भैया का गाना सुनकर लाड़ली बहनाएं भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने सीएम को राखियां बांधीं और बड़ी-सी राखी भेंट कर अपना स्नेह जताया। यानी मंच पर योजना की राशि भी पहुंची और भैया-बहन के रिश्ते में सुर-ताल भी जम गई। खाने के पैकेट्स पर टूट पड़े भाजपा कार्यकर्ता
मुरैना के कैलारस में भाजपा कार्यकर्ता पूड़ी-सब्जी पर टूट पड़े। जिससे अफरा-तफरी जैसा माहौल हो गया। खाने के पैकेट हासिल करने के लिए कार्यकर्ता एक-दूसरे को धकेलते नजर आए। इसका वीडियो भी सामने आया है। दरअसल, हाल ही में कैलारस से वीरपुर तक मेमो ट्रेन की शुरुआत हुई। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने वर्चुअली जुड़कर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा नेता, कार्यकर्ता और आम लोग जुटे थे। इनके लिए खाने का इंतजाम भी किया गया था। लेकिन कार्यक्रम खत्म होते ही जैसे ही खाने की बारी आई, व्यवस्था की पोल खुल गई। खाने के पैकेट लेने की ऐसी होड़ मची कि कार्यकर्ता एक-दूसरे को धक्का देने लगे। अब लोग चुटकी ले रहे हैं कि कार्यकर्ताओं का उत्साह तो मेमो ट्रेन की रफ्तार से भी तेज निकला। मंच छोड़कर चली गईं नाराज भाजपा विधायक
शहडोल में भाजपा विधायक मनीषा सिंह एक कार्यक्रम में बदइंतजामी से नाराज हुईं तो मंच ही छोड़कर चली गईं। इसका वीडियो भी सामने आया है। दरअसल, विधायक जिला स्तरीय पंच सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं। लेकिन यहां की अव्यवस्थाएं देखकर उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने कहा- यहां कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं है। कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए यहां नहीं रहेंगे। विधायक के मंच छोड़ते ही पंच, सरपंच समेत तमाम पंचायत प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सीधे कलेक्टर के पास पहुंच गए। पंचायत प्रतिनिधियों ने लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। दरअसल, इस पूरे मामले में प्रशासन से गणित गड़बड़ा गया। जिलेभर के पंचायत प्रतिनिधियों को बुला तो लिया गया, लेकिन उनकी संख्या के हिसाब से इंतजाम नहीं किए गए। हालात ये रहे कि कार्यक्रम में लोगों के बैठने तक की जगह नहीं थी और कई लोग खड़े नजर आए। फिर क्या था… जब कुर्सियां कम और मेहमान ज्यादा हों, तो तमाशा होना ही था। और अब अंदर की बात.. पोल खोल रहे बच्चे, सिस्टम ने अपनाया ये तरीका
मध्य प्रदेश में इन दिनों स्कूली बच्चे यानी ‘जेन अल्फा’ स्कूलों की बदहाली का हिसाब-किताब बता रहे हैं। स्कूलों की हालत सुधारने के लिए कहीं बच्चे आंदोलन कर रहे हैं, तो कहीं सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन। इनके वीडियो भी सामने आ रहे हैं। कहीं शिक्षक नहीं हैं, कहीं शिक्षक हैं तो स्कूल नहीं आ रहे। कहीं स्कूल जर्जर हालत में हैं, तो कहीं मूलभूत सुविधाओं का ही टोटा है। बच्चों के ये प्रदर्शन न सिर्फ स्कूलों की बदहाली उजागर कर रहे हैं, बल्कि सरकार की भी खूब किरकिरी करा रहे हैं। अब जब बच्चे ही स्कूलों की पोल खोलने लगे हैं, तो व्यवस्था सुधारने के बजाय पोल खुलने से रोकने का इंतजाम किए जाने की चर्चा है। सुना है कि स्कूलों में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद रखने के मौखिक निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बच्चों के स्कूल में मोबाइल लाने पर भी सख्ती की जा रही है। इतना ही नहीं, मीडिया समेत बाहरी लोगों को स्कूल परिसर में प्रवेश न देने के निर्देश दिए जाने की भी चर्चा है। यानी बच्चों की शिकायतें दूर करने के बजाय कैमरे बंद, मोबाइल बंद और बाहर वालों की एंट्री बंद! अब खरी बात ये है कि स्कूल की बदहाली कैमरे से दिखे या बच्चे मोबाइल से रिकॉर्ड करें, सवाल तो वहीं रहेगा- व्यवस्था कब सुधरेगी? इनपुट सहयोग – दुष्यंत सिकरवार (मुरैना), जयदेव (मैहर), सौरभ पांडे (शहडोल) ये भी पढ़ें –
गर्भगृह में वीआईपी, बाहर श्रद्धालु को धक्के: कुत्ते के गेटअप में तमाशा, सांसद ने मोदी को बनाया रेल मंत्री देश में वीआईपी कल्चर के चलते अक्सर आम जनता की फजीहत होती रहती है। ऐसा ही नजारा उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में भी देखने को मिला। जहां वीआईपी लोग गर्भगृह में आराम से दर्शन करते रहे, जबकि आम श्रद्धालु धक्के खाते रहे। इस मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर ही खुलते हैं। पूरी खबर पढ़ें

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