मुख्यमंत्री सुगम बस परिवहन सेवा 25 सितम्बर से शुरू करने के ऐलान के बाद प्रदेश के बस ऑपरेटर्स की समस्याओं के निदान के लिए राज्य सरकार ने मंत्री समूह का गठन किया है। यह मंत्री समूह जल्दी ही बैठक कर बस ऑपरेटर्स की मांगों पर चर्चा करने के साथ अपने सुझाव सरकार को देगा। इसके बाद मुख्यमंत्री इस पर अंंतिम निर्णय लेंगे। उधर मध्य प्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि सुगम बस परिवहन सेवा के रूट पर निजी बसें चलाने की अनुमति दी जाए और 15 साल पुरानी फिट बसों का भी परमिट जारी किया जाए। इसके लिए बस ऑपरेटर परिवहन मंत्री से दो दिन पहले मुलाकात भी कर चुके हैं। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह से 14 सितंबर को प्रदेश के बस ऑपरेटर्स संगठन पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल मिला था और मंत्री से मिलकर अपनी पेंडिंग मांगों पर अमल के लिए कहा। बताया जाता है कि इस दौरान मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बस ऑपरेटरों को आश्वस्त किया है कि जल्दी ही मुख्यमंत्री के साथ उनकी बैठक कराई जाएगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा के अंतर्गत बस ऑपरेटरों को सरकार द्वारा तय किए गए रूट पर बस संचालन की अनुमति के मामले में भी डिस्कशन होगा। मंत्री समूह में ये मंत्री शामिल हैं सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा बस ऑपरेटर और उनसे जुड़े अनुषांगिक विषयों के समाधान को लेकर जो मंत्री समूह गठित किया गया है उसमें परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावटस लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल शामिल हैं। परिवहन विभाग के सचिव को इस मंत्री समूह का सचिव बनाया गया है जो समूह के समन्वयक होंगे एवं परिवहन आयुक्त समूह के सहसमन्वयक होंगे। मंत्री समूह प्रदेश के बस ऑपरेटर से उनकी लंबित मांगों और समस्याओं के संबंध में बैठक के माध्यम से चर्चा करेगा एवं विचार विमर्श के बाद अपनी अंतिम अनुशंसा राज्य शासन को देगा। सुगम बस परिवहन में निजी बसों का भी रूट हो शामिल मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जयकुमार जैन ने बताया कि अभी प्रदेश में 15000 यात्री बस के स्थायी परमिट हैं और 12 से 15 गाड़ी हर बस रूट में चल रही है लेकिन पर्याप्त यात्री नहीं मिलते हैं। इसलिए बस संचालक चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सुगम बस परिवहन सेवा के लिए जो तय रूट हैं उसमें भी निजी बस ऑपरेटरों की बसों को बस चलाने की अनुमति दी जाए। जैन के अनुसार अभी जो स्थिति है उसमें पर्याप्त यात्री नहीं मिलते हैं और सुगम परिवहन सेवा में अतिरिक्त बसें चलने से यात्री और भी कम हो जाएंगे। इसलिए बस ऑपरेटर चाहते हैं कि उन रूट पर उन्हें भी अपनी बसों के संचालन की अनुमति दी जाए। जैन के मुताबिक शासन के पास न तो अपनी खु की बसें हैं और न ही परमिट है। सरकार निजी बस संचालकों से बसों का अनुबंध करके परमिट दे रही है तो निजी बस ऑपरेटरों को भी बस चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए। पुराने नियम से बनी बसों का हो रजिस्ट्रेशन, मिले संचालन की अनुमति बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जैन ने बताया कि परिवहन विभाग के नियम 153 के अंतर्गत केंद्र सरकार ने बसों के चेचिस और बैठक व्यवस्था में बदलाव के निर्देश जारी किए हैं। केंद्र सरकार द्वारा सितंबर 2025 में इसे लागू किया गया था लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने फरवरी 2026 में इसे प्रभावी किया है। इस नए कानून के लागू होने के बाद जिन बस संचालकों ने अपनी नई बसें पुरानी नियमावली के आधार पर तैयार कर ली थी उन्हें परमिट नहीं मिल रहा है और वह बसें खड़ी हुई हैं। बस ऑपरेटर का लाखों का नुकसान हो रहा है, इसलिए बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन की अभी मांग है कि जो बसें बन चुकी हैं उन्हें चलाने की अनुमति दी जाए। उनका रजिस्ट्रेशन किया जाए। दूसरे राज्यों ने तय की है अपनी व्यवस्था बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जैन ने कहा कि केरल, उड़ीसा जैसे राज्यों ने अपने यहां का नियम री स्टेट कर लिया है। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में आज भी पुरानी बसों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है। सरकार को केंद्र सरकार के नियमों के आधार पर अपने राज्य में छूट देने का अधिकार है तो बस ऑपरेटरों के हित में सरकार को पुरानी बसें रजिस्टर्ड करने का फैसला देना चाहिए। 15 साल पुरानी बसों को चार धाम का परमिट दे रहे पर 50 किमी का नहीं जय कुमार जैन ने कहा कि एक अन्य परेशानी 15 साल पुरानी गाड़ियों का परमिट नहीं देने को लेकर है। जिन बसों की लाइफ 15 साल हो चुकी है उन्हें सरकार पहले तो परमिट नहीं देती और अगर उनके पास परमिट है तो वे नियम के चलते चल नहीं पाती हैं, भले ही वह पूरी तरह से फिट हैं। ऐसे में सरकार को फिट बसों को संचालित करने की अनुमति देनी चाहिए। ऐसा दूसरे राज्यों में भी हो रहा है। जैन ने यह भी कहा कि 15 साल की अवधि पूरी कर चुकी बसों को चारों धाम के लिए परमिट दिया जाता है। प्रदेश के बाहर देश के दूसरे राज्यों में जाने के लिए परमिट दिया जाता है लेकिन अपने ही राज्य में 50 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए परमिट नहीं दिया जा रहा है। इस व्यवस्था में भी बदलाव होना चाहिए, इसकी मांग बस संचालक कर रहे हैं।
