ग्रामीणों को मकानों का मालिकाना हक देने के लिए 17 सितंबर से शुरू हुई स्वामित्व योजना की फ्री रजिस्ट्री दो दिन में ही अटक गई है। पटवारियों के बाद अब तहसीलदारों ने भी रजिस्ट्री प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया है। प्रदेश में एक महीने में करीब 50 लाख निशुल्क रजिस्ट्रियां करने का लक्ष्य है, लेकिन विरोध के कारण प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। भोपाल में 41,726 रजिस्ट्रियां होनी हैं। दो दिन में 12 हजार से ज्यादा का लक्ष्य था, लेकिन एक भी नहीं हुई। तहसीलदार संघ का कहना है कि सरकार ने तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को उप पंजीयक की शक्तियां दी हैं, लेकिन प्रक्रिया तय करने से पहले उनसे चर्चा नहीं की गई। सबसे बड़ी आपत्ति पुराने रिकॉर्ड, उनमें गड़बड़ियों और भविष्य में होने वाली कानूनी कार्रवाई को लेकर है। अफसरों के मुताबिक स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों का सर्वे पहले हो चुका है। इसके बाद कई संपत्तियों की खरीद-बिक्री हुई, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुए। कहीं आधार और अधिकार अभिलेख में नाम अलग हैं तो कई रिकॉर्ड में पिता या पति का नाम तक नहीं है। ऐसे रिकॉर्ड के आधार पर रजिस्ट्री हुई और बाद में विवाद निकला तो संबंधित अफसर भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। नई व्यवस्था में पटवारी को दस्तावेज का निष्पादक और तहसीलदार-नायब तहसीलदार को पंजीयक बनाया गया है। दोनों संघों की आपत्ति है कि समय-सीमा के दबाव में रिकॉर्ड संबंधी चूक हुई तो सिविल और क्रिमिनल केस का सामना करना पड़ सकता है। तहसीलदार संघ ने सरकार से कानूनी और व्यावहारिक पेंच दूर करने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की है। पटवारी-तहसीलदार क्यों विरोध में… जानें 8 पेच 1. पहले से वैध रिकॉर्ड, फिर रजिस्ट्री क्यों?
स्वामित्व योजना-2020 में तैयार अधिकार अभिलेख पहले से वैधानिक हैं। इनके आधार पर बैंक लोन सहित दूसरे काम हो सकते हैं। 2. आधार और रिकॉर्ड में नाम अलग
अधिकार अभिलेख बनाते समय 100% आधार ई-केवाईसी नहीं हुआ। इससे कई जगह आधार और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नाम अलग-अलग हैं। 3. गलती सुधरवाने कोर्ट जाना पड़ेगा
अफसरों का कहना है कि रजिस्ट्री के बाद रिकॉर्ड की गलती का सुधार राजस्व प्रक्रिया से नहीं होगा। इसके लिए सिविल कोर्ट जाना पड़ सकता है। 4. खरीद-बिक्री हो गई, रिकॉर्ड अपडेट नहीं
सर्वे के बाद कई भूखंड बिक चुके हैं। जिनकी नई प्रविष्टियां रिकॉर्ड में दर्ज नहीं, उनकी रिकॉर्ड से रजिस्ट्री विवाद में फंस सकती है। 5. पिता या पति का नाम तक नहीं
कई गांवों के रिकॉर्ड में हितग्राही के साथ पिता या पति का नाम दर्ज नहीं है। अफसर पहले ऐसी प्रविष्टियां सुधारने की मांग कर रहे हैं। 6. चूक हुई तो सिविल-क्रिमिनल केस संभव
पटवारी निष्पादक और तहसीलदार-नायब तहसीलदार पंजीयक बनाए गए हैं। मानवीय चूक पर कानूनी कार्रवाई की आशंका है, इसलिए संघ विधिक संरक्षण चाहता है। 7. पंजीयन का अधिकार देने पर सवाल
संघ का कहना है कि रजिस्ट्रेशन एक्ट में उप पंजीयक के अधिकार पहले से तय हैं। जरूरी कानूनी बदलाव के बिना तहसीलदारों को ये शक्तियां देने पर सवाल हैं। 8. आबादी भूमि में कलेक्टर की मंजूरी का पेच
आबादी भूमि को निजी स्वामित्व में बदलने के कुछ मामलों में मप्र भू-राजस्व संहिता के तहत कलेक्टर की विधिवत अनुमति जरूरी है। अफसर बोले- सबकी बात सुन रहे, 1-2 दिन में समाधान सभी पक्ष संतुष्ट हों, ऐसा समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। सबकी बात सुनी जा रही है। उम्मीद है कि एक-दो दिन में सब ठीक हो जाएगा।”- रमेश कुमार, प्रमुख सचिव, राजस्व भोपाल में 150 पटवारियों को जिम्मा, कैंप लगे पर काम नहीं भोपाल के करीब 250 पटवारियों में से 150 को स्वामित्व योजना की रजिस्ट्रियों की जिम्मेदारी दी गई है। एक पटवारी के जिम्मे करीब 40 रजिस्ट्रियां हैं। प्रदेश में करीब 19 हजार पटवारियों को इस काम में लगाया गया है। पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर गांव में ही सारा एप से रजिस्ट्री की व्यवस्था की गई, लेकिन विरोध के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। मप्र पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद गिरी और संघ के संदीप शर्मा का कहना है कि हर मकान की रजिस्ट्री में पटवारी को निष्पादक बनाया गया है। भविष्य में संपत्ति को लेकर विवाद होने पर उसके भी कानूनी कार्रवाई में फंसने की आशंका है। फिलहाल संघ सरकार से बातचीत कर रहा है।
