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धर्मसभा की अनुमति निरस्त होने के बाद हाईकोर्ट में चुनौती:भोपाल में होना था कार्यक्रम, टी राजा सिंह थे मुख्य वक्ता; 1 जून होगी अगली सुनवाई

राजधानी भोपाल में 31 मई को प्रस्तावित बृहद धर्मसभा को लेकर प्रशासन और आयोजक आमने-सामने आ गए हैं। गांधी नगर बस स्टैंड के पास आयोजित होने वाली इस सभा की अनुमति निरस्त किए जाने के बाद मामला अब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में धर्म रक्षक बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य मामले में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अतुल जैस्वानी और राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता आदित्य चौबे उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि भोपाल पुलिस के संबंधित प्राधिकरण से अब तक आवश्यक निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं और निर्देश लेने की प्रक्रिया जारी है। मामले की प्रकृति को देखते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल राज्य का पक्ष जाने बिना कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने राज्य शासन को एक दिन के भीतर आवश्यक निर्देश प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 1 जून 2026 को होगी। आयोजकों का दावा है कि शाम तक फैसला आ सकता है। इस बार धर्मसभा में तेलंगाना के चर्चित विधायक टी राजा सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होने वाले थे, जिससे कार्यक्रम का दायरा और भी बड़ा माना जा रहा था। 12 साल से हो रहा आयोजन, इस बार बढ़ा विवाद कार्यक्रम के आयोजक और धर्मसभा अध्यक्ष माधव सेन के अनुसार, यह आयोजन पिछले 12 सालों से लगातार किया जा रहा है। हर साल गांधी नगर क्षेत्र में महाकाल त्रिशूल यात्रा के साथ धर्मसभा आयोजित होती है। पिछले साल इसमें कपिल मिश्रा शामिल हुए थे। अनुमति पर टकराव, कोर्ट की शरण माधव सेन ने बताया कि प्रशासन ने शुरुआत में अनुमति देने के संकेत दिए थे, लेकिन करीब 6 दिन तक मामला लंबित रखने के बाद लिखित रूप से अनुमति निरस्त कर दी गई। । कार्यक्रम की अनुमति निरस्त किए जाने के बाद सामाजिक संस्था ‘धर्मरक्षक’ ने प्रशासन के फैसले को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की। प्रशासन का तर्क- भीड़ और ट्रैफिक का दबाव पुलिस प्रशासन ने एक लेटर जारी कर कहा कि गांधी नगर बस स्टैंड क्षेत्र पहले से ही अत्यधिक व्यस्त और भीड़भाड़ वाला है। यहां व्यावसायिक गतिविधियां, होटल और बाजार होने के कारण यातायात पर दबाव रहता है। पुलिस के अनुसार, स्थल की क्षमता 500-600 लोगों तक सीमित है, जबकि आयोजकों ने 5 से 6 हजार लोगों के जुटने की बात आवेदन में लिखी थी। ऐसे में बड़ी भीड़ से कानून-व्यवस्था और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। आयोजकों का आरोप- छोटे कारणों से रोकी अनुमति माधव सेन ने कहा कि प्रशासन ने छोटे-छोटे कारणों को आधार बनाकर अनुमति निरस्त की है। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए कोर्ट से राहत की उम्मीद जताई है। इस पूरे विवाद में अब सभी की नजरें हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। फैसला आने के बाद ही तय होगा कि 31 मई को धर्मसभा आयोजित हो पाएगी या नहीं। धर्मसभा विवाद- परमिशन से कोर्ट तक की टाइमलाइन हिंदू उत्सव समिति ने उठाए सवाल श्री हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कार्यक्रम की अनुमति निरस्त किए जाने पर प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टी राजा सिंह जैसे वक्ता को आमंत्रित किए जाने के बावजूद प्रशासन ने कथित तौर पर दबाव में आकर अनुमति रद्द की। तिवारी ने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है कि मध्य प्रदेश में “हिंदूवादी सरकार” होने के बावजूद हिंदू संगठनों को कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिल पा रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब कार्यक्रमों का निर्णय अन्य समुदायों के दबाव में होगा। साथ ही मुख्यमंत्री मोहन यादव से हस्तक्षेप की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले का संज्ञान लेकर धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और कार्यक्रम की अनुमति सुनिश्चित करनी चाहिए।

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