ट्रेन में सफर के दौरान चूहा दिखना अब सिर्फ गंदगी का संकेत नहीं रह गया है, बल्कि यात्री की सुरक्षा का सवाल बन चुका है। हाल ही में ऊना-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में सो रहे 78 वर्षीय बुजुर्ग की नाक चूहे ने कुतर दी। वहीं, इंदौर-दौंड एक्सप्रेस में एसी डक्ट से चूहे और कॉकरोच निकलने की शिकायत सामने आई। कुछ महीने पहले कटनी के एक यात्री का एसी कोच में चूहे ने बैग और कपड़े कुतर दिए थे। जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे रेलवे की सेवा में कमी मानते हुए 15 हजार रुपए क्षतिपूर्ति का आदेश दिया। मामला सिर्फ इन घटनाओं तक सीमित नहीं है। रेलवे के रिकॉर्ड और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट बताते हैं कि ट्रेनों में चूहे-कॉकरोच की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। 2013 की कैग रिपोर्ट में 88 ट्रेनों के निरीक्षण और करीब 5,600 यात्रियों के सर्वे में 24% एसी और 18% गैर-एसी यात्रियों ने बताया था कि उन्होंने ट्रेन में चूहे या कॉकरोच देखे। तब भी कैग ने रेलवे की कीट नियंत्रण व्यवस्था को प्रभावी नहीं माना था। आखिर रेल के सफर में चूहे बड़ी समस्या क्यों बनते जा रहे हैं, पढ़िए इस रिपोर्ट में… सबसे पहले तीन केस जिसमें चूहों ने उत्पात मचाया केस:1- फर्स्ट एसी में सो रहे बुजुर्ग की नाक कुतरी 24 अगस्त 2026 को ऊना-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे 78 वर्षीय सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमांडेंट एचपी करण के साथ चूहे ने ऐसी हरकत की, जिसने रेलवे की कीट नियंत्रण व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए। परिजन के मुताबिक, सफर शुरू होने के कुछ समय बाद ही कोच में चूहा दिखाई देने लगा था। परिवार ने रेलवे कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी और कोच में गंदगी की शिकायत भी की। कर्मचारियों ने सफाई तो कर दी, लेकिन कीट नियंत्रण नहीं किया। रात करीब 10 बजे चूहे ने बुजुर्ग की नाक कुतर दी। सुबह इंदौर पहुंचने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज शुरू हुआ। घटना के बाद रेलवे ने कार्रवाई की। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी के मुताबिक, इंदौर कोचिंग डिपो के एसएसई निशित सिंह को निलंबित किया गया है। सफाई और कीट नियंत्रण के लिए जिम्मेदार डायनमिक कंपनी पर जुर्माना भी लगाया गया। केस:2- एसी डक्ट से बार-बार निकलते रहे चूहे 1 सितंबर को इंदौर-दौंड एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में पांच महीने की बच्ची के साथ सफर कर रहीं एकता दुबे का करीब 16 घंटे का सफर परेशानी भरा रहा। एकता के मुताबिक, कोच के एसी डक्ट से चूहे बार-बार बाहर आते-जाते रहे। इससे यात्रियों के लिए सीट पर बैठना और रात में सोना मुश्किल हो गया। उन्होंने रेलवे से शिकायत करते हुए कोच में कॉकरोच होने की बात भी बताई। फर्स्ट एसी जैसे प्रीमियम कोच में एक साथ चूहों और कॉकरोच की मौजूदगी ने सफाई और कीट नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। यात्रियों का सवाल है कि यदि नियमित रूप से कीट नियंत्रण और कोच की जांच होती है तो चूहे एसी डक्ट के रास्ते बार-बार कोच तक कैसे पहुंच रहे हैं? केस:3- बैग-कपड़े कुतरे, देना पड़ा 15 हजार रुपए हर्जाना कटनी की यह घटना वर्ष 2020 की है, लेकिन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें रेलवे को यात्री को क्षतिपूर्ति देनी पड़ी।
कटनी के आदर्श कॉलोनी निवासी विपिन दुबे ने 17 फरवरी 2020 को कटनी से कल्याण जाने के लिए थर्ड एसी में सफर किया था। उन्होंने बैग सीट के नीचे रखा था। कुछ समय बाद देखा तो चूहों ने बैग कुतर दिया था। उसमें रखे कपड़े और अन्य सामान भी खराब हो गए। शिकायत के बावजूद संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, कटनी में परिवाद दायर किया। आयोग ने माना कि एसी कोच में चूहों की मौजूदगी और यात्री के सामान को नुकसान रेलवे की सेवा में कमी का मामला है।
आयोग ने रेलवे को कुल 15 हजार रुपए देने का आदेश दिया। इसमें 5 हजार रुपए सामान के नुकसान, 5 हजार रुपए मानसिक पीड़ा और 5 हजार रुपए वाद व्यय के शामिल थे। यात्रियों से भास्कर ने पूछे उनके अनुभव यात्री बोले- चूहों के डर से खाना तक नहीं खाते भास्कर टीम ने इंदौर और उज्जैन रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से बात की। एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों ने चूहों के साथ-साथ सफाई व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। इंदौर से बीना जा रहे युसूफ समीर ने बताया कि वे कई बार ट्रेन से सफर कर चुके हैं। उनके मुताबिक, पिछले सफर में भी गोंडवाना एक्सप्रेस में कॉकरोच और चूहे दिखाई दिए थे। उन्होंने कहा कि रेलवे को स्वच्छता पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। एक अन्य यात्री ने कहा कि एसी कोच में ज्यादा किराया देकर यात्री सुरक्षित और साफ-सुथरे सफर की उम्मीद करता है। वहां चूहे और कॉकरोच मिलना चिंता की बात है। इलाहाबाद जा रहे राजेश श्यामलाल ने कहा कि चूहों के डर से खाना तक खाने में परेशानी होती है। अब जानिए रेलवे क्या कर रहा… 13 साल से समस्या की जानकारी, लेकिन रोकथाम नहीं 2013 में कैग ने रेलवे की कीट नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। कई जोन में तय समय के अनुसार कीट नियंत्रण नहीं हो रहा था। 88 ट्रेनों के निरीक्षण में छह जोन के चयनित एसी और गैर-एसी कोचों में कॉकरोच मिले थे। करीब आधे यात्रियों ने भी कीट नियंत्रण व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई थी। यानी समस्या की पहचान 2010-11 के ऑडिट में हो गई थी और रिपोर्ट 2013 में संसद के सामने आई। इसके बावजूद 2025 की कैग रिपोर्ट में भी रेलवे को इसी समस्या से जूझते पाया गया। रेलवे के पास चूहों को रोकने की व्यवस्था तय रेलवे के पास चूहों को रोकने के लिए बाकायदा प्रक्रिया निर्धारित है। 2025 की कैग रिपोर्ट के अनुसार एसी कोच और पेंट्री कार में हर प्राथमिक रखरखाव के दौरान तथा आरक्षित गैर-एसी कोच में हर सप्ताह चूहों का नियंत्रण किया जाना है। इसके लिए चूहे मारने वाली दवा, गोंद वाले फंदे और विशेष बॉक्स जैसी व्यवस्थाएं निर्धारित हैं। लापरवाही मिलने पर जुर्माने का भी प्रावधान है। तय अवधि में कीट नियंत्रण नहीं होने पर प्रति कोच 250 रुपए, यात्री की लिखित शिकायत पर 500 रुपए और रेलवे अधिकारी द्वारा कमी पकड़े जाने पर प्रति कोच 500 रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। कैग के सर्वे में हर चार में से एक यात्री ने चूहे देखे कैग यात्रियों से सीधे भी इस समस्या के बारे में पूछ चुका है। 2,426 यात्रियों के सर्वे में 642 यानी 26% यात्रियों ने कहा कि उन्होंने सफर के दौरान कोच में कॉकरोच या चूहे देखे। यह आंकड़ा सिर्फ रेलवे में दर्ज शिकायतों का नहीं, बल्कि यात्रियों के स्वतंत्र सर्वे का निष्कर्ष है। इसलिए यह रेलवे की सफाई और कीट नियंत्रण व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है। चूहे ट्रेन में आते कहां से हैं? रेलवे के दस्तावेज बताते हैं कि चूहे की समस्या सिर्फ कोच के अंदर की सफाई से जुड़ी नहीं है। कोचिंग डिपो, पिट लाइन, स्टेबलिंग लाइन और आसपास के यार्ड को चूहों के नियंत्रण के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। यहां चूहों के बिल तलाशने, उन्हें बंद करने और जरूरत के अनुसार धुआं उपचार जैसी प्रक्रिया का प्रावधान है। ट्रेन के आसपास पहुंचने के बाद चूहे कोच के नीचे की जगहों, छोटे गैप और उपकरणों के आसपास छिप सकते हैं। कोच के भीतर केबल और फर्श से जुड़े हिस्सों में चूहों का प्रवेश रोकने के लिए सुरक्षा अवरोध, गोंद वाले बोर्ड और चूहे पकड़ने के फंदों का इस्तेमाल किया जाता है। यानी चूहे को रोकने की पहली चुनौती चलती ट्रेन नहीं, बल्कि वह जगह है जहां ट्रेन लंबे समय तक खड़ी रहती है। सवाल सिर्फ चूहे का नहीं, व्यवस्था का है चूहे के लिए ट्रेन में तीन चीजें अहम हैं- छिपने की जगह, भोजन और पानी। यात्रियों का बचा हुआ खाना, खाद्य पैकेट और कचरा उसे कोच में बने रहने का मौका देते हैं। ऐसे में किसी यात्री का बैग या कपड़ा कुतर दिया जाना सिर्फ एक चूहे की हरकत नहीं, बल्कि सिस्टम पर सवाल है कि वह कोच तक पहुंचा कैसे और उसे रोकने की व्यवस्था कितनी कारगर थी। रेलवे के पीआरओ मुकेश कुमार का कहना है कि चूहों को रोकने के लिए व्यवस्था मौजूद है और हाल की घटनाओं के बाद कार्रवाई भी की गई है।
