धार की ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई गाइड लाइन लागू होने के बाद रविवार को विधिवत पूजा-अर्चना की गई। भोज उत्सव समिति और हिंदू समाज के लोगों ने सूर्योदय के साथ ही मां वाग्देवी की आराधना की और सुबह 11:45 बजे आरती की। रविवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र लेकर भोजशाला पहुंचे। समिति ने सबसे पहले परिसर को गंगाजल-गोमूत्र से शुद्ध किया। इसके बाद गर्भगृह को रंगोली से सजाया गया। परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को भी गर्भगृह में स्थापित किया गया। इसके साथ ही सूर्योदय से ही मंत्रोच्चार, देवी अनुष्ठान और वास्तु पूजन शुरू हो गया। देखिए तस्वीरें… सीढ़ियों पर लगे गेट पर फहराया ध्वज आरती के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ध्वजारोहण के लिए भोजशाला के गुंबद की ओर गईं, लेकिन गुंबद पर सुरक्षा के लिहाज से कांटेदार तार लगे होने के कारण उन्होंने सीढ़ियों के ऊपर लगे दरवाजे (गेट) पर ही ध्वज की पूजा-अर्चना कर ध्वजारोहण किया। मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि किसी भी मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन कांटेदार तारों के कारण हमने छत की ओर जाने वाले गेट पर ध्वज फहराया है। इससे पहले शनिवार शाम को भी उन्होंने और कलेक्टर-एसपी ने यहां पहुंचकर पूजा की थी। भोजशाला को मिलेगा भव्य स्वरूप केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले शुक्रवार के दिन यहां तनाव की स्थिति रहती थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो गई है और श्रद्धालु कभी भी दर्शन कर सकते हैं। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कहा है कि भोजशाला को उसके पुराने वैभव के साथ संवारा जाएगा। इसे और बेहतर तरीके से विकसित किया जाएगा ताकि देश-प्रदेश के लोग यहां आकर मां वाग्देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। यह खबर भी पढ़ें… MP हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना धार की ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई गाइड लाइन लागू होने के बाद रविवार को विधिवत पूजा-अर्चना की गई। भोज उत्सव समिति और हिंदू समाज के लोगों ने सूर्योदय के साथ ही मां वाग्देवी की आराधना की और सुबह 11:45 बजे आरती की। पढ़ें पूरी खबर
