जबलपुर में सामने आए करीब 34 करोड़ रुपए के धान परिवहन घोटाले की राज्य स्तरीय जांच कराई जाएगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को जल्द जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन को शपथ पत्र के साथ जवाब देने और आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) को अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। स्कूटर और बसों से भी धान परिवहन दिखाया यह मामला नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए हाई कोर्ट पहुंचा है। याचिकाकर्ताओं पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि जबलपुर में जांच के दौरान धान परिवहन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 100 से 200 क्विंटल तक धान के परिवहन के लिए दोपहिया और तिपहिया वाहनों के नंबर दर्ज किए गए थे। कुछ मामलों में बसों समेत ऐसे वाहनों से भी धान परिवहन दर्शाया गया, जिनसे इतनी मात्रा में धान ले जाना संभव नहीं था। 90 से ज्यादा FIR दर्ज हुईं याचिकाकर्ता के मुताबिक जबलपुर में जांच के बाद अलग-अलग लोगों के खिलाफ 90 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि जिस तरह की गड़बड़ी जबलपुर में सामने आई, उससे संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है। याचिका में बताया गया कि मंडला, बालाघाट, सिवनी और डिंडौरी समेत कुछ जिलों में भी मामले दर्ज किए गए, लेकिन प्रदेश के बाकी हिस्सों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। 27 जिलों में जांच के आदेश का भी हवाला याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने प्रदेश के 27 जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कार्रवाई सीमित रही। सरकार की ओर से पहले बताया गया था कि कुछ अन्य जिलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। याचिकाकर्ता ने इस जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सिर्फ एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। घोटाले की व्यापकता को देखते हुए प्रदेश स्तर पर इसकी जांच जरूरी है। कोर्ट ने कहा- जबलपुर कलेक्टर की कार्रवाई से घोटाला सामने आया सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यदि तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने सक्रियता नहीं दिखाई होती तो यह मामला सामने नहीं आता। कोर्ट ने माना कि इसी तरह दूसरे जिलों में भी कलेक्टरों को कार्रवाई करनी चाहिए थी। दस्तावेजों के अवलोकन के बाद बेंच ने पूरे प्रदेश में जांच की जरूरत बताई और सभी कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। EOW से भी मांगी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध ब्यूरो को जबलपुर धान घोटाले में चल रही जांच और अब तक की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। वहीं नागरिक आपूर्ति निगम को शपथ पत्र के साथ यह बताना होगा कि जबलपुर कलेक्टर की कार्रवाई के बाद प्रदेश स्तर पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अब सभी जिलों की रिपोर्ट और EOW की स्टेटस रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि धान परिवहन में सामने आई गड़बड़ी कितने जिलों तक फैली है और इसमें कितने लोग जांच के दायरे में आते हैं।
