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PM मोदी का ‘मिशन पंजाब’:2027 चुनाव का लॉन्च पैड दोआबा, 32% दलित आबादी पर नजर; चंडीगढ़ में ₹ 2 करोड़ के टेंट में रैली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को 5 महीने बाद फिर पंजाब आ रहे हैं। चंडीगढ़ में PM दोपहर करीब सवा 1 बजे आएंगे। फिर यहां 2 करोड़ रुपए के AC टेंट में रैली करेंगे। वे यहां 45 मिनट रुकेंगे। इसके बाद जालंधर में उनके 4 कार्यक्रम हैं। सरकारी एजेंडे में ये डेवलपमेंट प्रोजेक्टों का उद्घाटन है लेकिन यह सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहने वाला। इसकी वजह भी है। पहले फरवरी में डेरा सचखंड बल्लां और अब जालंधर में जनसभा, साफ है कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए दलित लैंड दोआबा को लॉन्च पैड बना रही है। ऐसे समय जब कांग्रेस अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है, आम आदमी पार्टी सरकार विपक्ष के निशाने पर है और भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव बिसात बिछाने में जुटी है, प्रधानमंत्री का यह दौरा कई राजनीतिक संकेत देता है। PM अभी पंजाब क्यों आ रहे हैं?
प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब चुनाव में 7 महीने का टाइम बचा है। कांग्रेस हाईकमान अभी तक नेतृत्व और संगठन को लेकर कुछ क्लियर नहीं कर पा रहा है। पूर्व CM चरणजीत चन्नी और प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग का गुट आमने-सामने है। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी सरकार कानून-व्यवस्था, नशे, उद्योगों के पलायन और वित्तीय स्थिति जैसे मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर है। PM मोदी और भाजपा इसी राजनीतिक माहौल को अवसर के रूप में देख रही है।

PM के दौरे के 3 बड़े राजनीतिक संदेश जानिए, PM बैक टू बैक जालंधर ही क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पंजाब दौरे के लिए जालंधर को चुना है। पहली नजर में यह अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन के उद्घाटन का कार्यक्रम लगता है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे चुनावी गणित भी है। जालंधर केवल एक शहर नहीं, बल्कि 23 सीटों वाले दोआबा की राजनीति का केंद्र है। जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) वाला यह इलाका लंबे समय से पंजाब की चुनावी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता रहा है। राज्य की करीब 32 प्रतिशत अनुसूचित जाति आबादी में बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में रहता है। कई विधानसभा सीटों पर दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस, अकाली दल, आम आदमी पार्टी और अब भाजपा- सभी की नजर दोआबा पर रहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह सिर्फ शहरी या पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पंजाब के नए सामाजिक समीकरणों में अपनी जगह बना रही है। श्री संत रविदास एक्सप्रेस… सिर्फ ट्रेन नहीं, चुनावी संकेत भी
प्रधानमंत्री जालंधर से अमृतसर (छेहर्टा) से वाराणसी जाने वाली नई श्री संत रविदास एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। सरकारी तौर पर इसका उद्देश्य धार्मिक और यात्री सुविधा बढ़ाना है, लेकिन राजनीतिक रूप से इसका महत्व भी कम नहीं माना जा रहा। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, जबकि संत रविदास का दोआबा और रविदासिया समाज में विशेष सम्मान है। ऐसे में यह पहल भाजपा के लिए सांस्कृतिक और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर संदेश देने का माध्यम बन सकती है। भाजपा को क्या राजनीतिक फायदा मिलने की उम्मीद?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस दौरे से तीन स्तर पर लाभ लेने की कोशिश करेगी। (हालांकि राजनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि सिर्फ प्रधानमंत्री का दौरा चुनावी सफलता की गारंटी नहीं हो सकता। भाजपा को इसका लाभ तभी मिलेगा जब संगठन गांव और बूथ स्तर तक इसे राजनीतिक समर्थन में बदल पाएगा।) एक्सपर्ट क्या कहते हैं? – राजनीतिक विश्लेषक प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू का कहना है कि छह महीने में प्रधानमंत्री का दूसरा पंजाब दौरा इस बात का संकेत है कि भाजपा अब पंजाब को गंभीरता से ले रही है। उनके मुताबिक पार्टी विकास, डेरा संपर्क और दलित वोट बैंक के सहारे अपना सामाजिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। – राजनीतिक विश्लेषक एडवोकेट नईम खान मानते हैं कि जालंधर का चयन सोची-समझी रणनीति है। उनका कहना है कि अगर प्रधानमंत्री उद्योग, व्यापार, किसानों, निवेश या रोजगार से जुड़ी कोई बड़ी घोषणा करते हैं तो उसका राजनीतिक असर सिर्फ दोआबा ही नहीं, पूरे पंजाब में दिखाई दे सकता है।

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