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धीरेंद्र शास्त्री बोले- हमारे राम सीधे, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े:कहा- खोपड़िया भी टेढ़ी, नाम भी टेढ़ा; ऐसे ही बयान पर प्रदीप मिश्रा ने रगड़ी थी नाक

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण को लेकर विवादित बयान दिया है। शिवपुरी में श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने कहा- हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े। तुम्हारे ठाकुर जी की खपड़िया भी टेढ़ी, नाम भी टेढ़ा, चलते और खड़े भी टेढ़े होते हैं। उन्होंने कहा- हमारे वालों का धाम भी सीधा अयोध्या, तुम्हारे वालों का वृंदावन। उन्होंने कहा- गायों को चराना तो खेल भी है, बंदरों को नचाना खेल नहीं। बंसी बजाना कोई बड़ी बात नहीं, हमारे यहां भी कलाकार बंसी बजा लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान कृष्ण पर्वत उठा लेते हैं तो इसमें क्या बड़ी बात है, हमारे भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत उड़ा दिया। इससे पहले कथावाचक प्रदीप मिश्रा भी राधारानी पर टिप्पणी को लेकर विवादों में आए थे। जून 2024 में उन्होंने बरसाना के राधारानी मंदिर में नाक रगड़कर माफी मांगी थी। ‘तुमारे वाले ठाकुर जी तीन जगह से टेढ़े होते हैं’ धीरेंद्र शास्त्री ने कथा में बैठे श्रद्धालुओं से कहा, “तुमारे वाले तो एक भी फोटो देख लो तुम अपने वाले ठाकुर जी की। एक भी फोटो। बैठे हैं ऐसे तो ऐसे… कहीं ऐसे। और तुमारे वाले तो खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े। पांव के ऊपर पांव, कमर कहीं लचकाएं, खपड़िया ऐसी करें, ऐसी खपड़िया करें, फिर बंसी बजाएं ऐसे टेढ़े करके।” इसके बाद उन्होंने भगवान राम की तुलना करते हुए कहा, “हमारे वाले तो खड़े भी होते हैं एकदम सीधे। हमारे वाले का नाम भी सीधा। हमारे वाले का चलना भी सीधा, हमारे वाले दिखते भी सीधे। तुमारे वालों का नाम भी टेढ़ा, चलते भी टेढ़े, खड़े भी टेढ़े होते हैं। हमारे वालों का धाम भी सीधा – अयोध्या! तुमारे वाले का – वृंदावन!” ‘बंसी बजाना खेल भी है, धनुष चलाना खेल नहीं’ भगवान राम और कृष्ण की तुलना करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बंसी बजाने और धनुष चलाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हंसना… बंसी का बजाना तो खेल भी है, धनुष चलाना खेल नहीं।” इसके बाद उन्होंने कथा में बैठे लोगों से कहा, “जितने ठाकुर जी वाले बैठे हैं, आज तो तुम्हारे ठाकुर जी की भी जय-जयकार हो रही है।” फिर उन्होंने बंसी बजा रहे कलाकार की ओर इशारा करते हुए कहा, “और सुनो, तुम्हारे ठाकुर जी क्या करते? बंसी बजाते? तो बंसी कोई बड़ी बात थोड़ी है। देखो, हमारे यहां तो ये भी बजा रहा है। बजा-बजा, बजा। लो, लो।” इसके बाद कलाकार ने कुछ देर तक बंसी की धुन सुनाई। धीरेंद्र शास्त्री ने फिर कथा में बैठे श्रद्धालुओं से भगवान राम को मानने वालों के बारे में पूछा, “राम जी वाले कितने बैठे हैं हाथ उठाओ। हां! आज तुम लोग फूले नहीं समाओगे।” इसके बाद उन्होंने फिर कहा, “बंसी का बजाना तो खेल भी है, पर धनुष चलाना खेल नहीं।” ‘गाय चराना तो खेल भी है, बंदरों को नचाना खेल नहीं’ धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण के गाय चराने और पर्वत उठाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोग कहेंगे कि हमारे वाले भगवान तो गाय चराते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि गाय तो कोई भी चरा सकता है। उन्होंने गाते हुए कहा, “गायों को चराना तो खेल भी है, बंदरों को नचाना खेल नहीं।” इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने का जिक्र करते हुए कहा, “तुम कहोगे कि हमारे वाले तो पर्वत उठा लेते हैं, ये कोई बड़ी बात है क्या? हमारे वाले भगवान के चेला ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया।” यहां उनका इशारा भगवान राम के भक्त हनुमान की ओर था। मान्यता के अनुसार, हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए पूरा पर्वत उठा लाए थे। ‘हम ठाकुर जी के विरोधी नहीं हैं, विनोद की बात आ गई’ अपने बयान के आखिर में धीरेंद्र शास्त्री ने साफ किया कि उनकी बात का मतलब भगवान कृष्ण का विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब ये नहीं है कि हम ठाकुर जी के विरोधी हैं। हम उनके बिल्कुल भी विरोधी नहीं हैं, विनोद की बात आ गई जो हमने कह दिया।”

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