बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। पश्चिम बंगाल के हावड़ा में दुर्गा पूजा और मांस-मछली के सेवन को लेकर दिए बयान पर शुरू हुआ विवाद अब स्कॉटलैंड के ग्लासगो तक पहुंच गया है। स्काटलैंड के ग्लासगो में हिंदु मंदिर में लंदन के समय शाम 5 बजे बुधवार को सनातन संगम का आयोजन हुआ। संगम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने अपने पुराने बयान को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया है और उन्होंने कभी किसी के खाने-पीने या पहनावे पर रोक लगाने की बात नहीं कही। बोले- आपकी मानसिक स्थिति ठीक हो धीरेंद्र शास्त्री ने विरोधियों को जवाब देते हुए कहा, “आपकी मानसिक स्थिति ठीक हो, तो कोई भी हालात हो… हमें तो यहां भी भगवान का प्रचार करना है और भारत में भी।” उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से निकलने के बाद उनके बयान को लेकर तेजी से चर्चा शुरू हो गई। उनके मुताबिक, उन्होंने किसी के व्यक्तिगत खान-पान को लेकर टिप्पणी नहीं की थी। धीरेंद्र शास्त्री बोले-जिन्हें खाना है, घर पर खाएं धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हमने कभी किसी के खाने-पीने या पहनावे पर कुछ नहीं कहा। दुर्गा पूजा की बात थी तो हमने सीधी सी बात कही कि देवी के आसपास पवित्रता रखें। जिन्हें खाना है, वह अपने घरों पर खाएं। हम किसी के खाने पर रोक नहीं लगा सकते!” उन्होंने कहा कि उनका मुद्दा किसी व्यक्ति के भोजन से नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों और पूजा के वातावरण की पवित्रता से जुड़ा था। बलि प्रथा पर बोले- हिंसा के खिलाफ बात करेंगे धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि धार्मिक गुरु होने के नाते वह हिंसा के मुद्दे पर बात कर सकते हैं। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान होने वाली बलि प्रथा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें यह अच्छी नहीं लगती। उन्होंने कहा, “वह कैसी मां है जो किसी बेटे की बलि लेगी? अगर मां को बलि लेनी होगी, तो वह खुद ले लेगी, लोग क्यों काट रहे हैं?” बोले- हम खुद बंगाली हैं, हम भारत के ही हैं धीरेंद्र शास्त्री ने उन लोगों को भी जवाब दिया, जिन्होंने उनके बयान के बाद कहा था कि ‘बागेश्वर बाबा बंगालियों को समझा रहे हैं।’ उन्होंने कहा, “हम खुद बंगाली हैं, हम भारत के ही हैं!” उन्होंने स्वामी विवेकानंद, स्वामी रामकृष्ण परमहंस और बामाखेपा का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इन्हीं संतों की परंपरा और विचारों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “हम आपके भोजन पर क्यों बोलेंगे? आप सब तो हमारे अपने हैं। लेकिन जीव हिंसा और बलि पर हम बोलते हैं और बोलते रहेंगे।” 6 सितंबर को हावड़ा में दिया था बयान दरअसल, 6 सितंबर को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हनुमंत कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने नवरात्रि और दुर्गा पूजा के 9 दिनों तक पूजा पंडालों के आसपास मांस-मछली की बिक्री और सेवन बंद रखने की अपील की थी। उन्होंने इस दौरान मांसाहार करने वालों को ‘पाखंडी’ भी कहा था। उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद शुरू हो गया था। भाजपा-कांग्रेस नेताओं ने किया विरोध धीरेंद्र शास्त्री के बयान का भाजपा और कांग्रेस समेत कई नेताओं ने विरोध किया था। उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनके बयान से बंगालियों की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। अब ग्लासगो से आई सफाई में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि उनका मकसद किसी के खान-पान पर रोक लगाना नहीं था। उन्होंने साफ किया कि वह धार्मिक स्थलों की पवित्रता और जीव हिंसा के मुद्दे पर अपनी बात आगे भी रखते रहेंगे।
