भोपाल-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग- 46 के निर्माण पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। राजमार्ग के अत्यधिक संवेदनशील बरेठा घाट और केसला बागदेव हिस्से में चार लेन वाली सड़क के निर्माण को लेकर अब वन विभाग ने नया पेच फंसा दिया है। हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद माना जा रहा था कि इस वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्र में सड़क निर्माण का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो चुका है। परंतु अंतिम समय में सतपुड़ा बाघ अभयारण्य के अधिकारियों ने नई शर्त सामने रख दी है। अभयारण्य प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि जब तक एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुराना प्रस्ताव और विवाद का कारण दरअसल, पिछले माह ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, वन्यजीव बोर्ड और केंद्र सरकार के बीच सहमति बनी थी। तय योजना के अनुसार 20.9 किलोमीटर लंबे इस संवेदनशील हिस्से में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 2.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर निर्मित किया जाना था। इसी आधार पर उच्च न्यायालय में अनुमति से जुड़ी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। अभयारण्य प्रबंधन की नई मांग: अब वन विभाग का तर्क है कि वर्तमान में प्रस्तावित 2.5 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर और उसके ढांचे बाघों तथा अन्य वन्यजीवों की मुक्त आवाजाही के लिए पर्याप्त नहीं हैं। बाघों के आवागमन मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए अधिकारियों ने मांग रखी है कि एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई बढ़ाकर सीधे 5.3 किलोमीटर की जाए। वन विभाग के इस कड़े रुख के कारण राजमार्ग निर्माण की प्रक्रिया एक बार फिर रुक गई है।
