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किसानों के आगे फिर झुकी एमपी सरकार:उज्जैन में ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की ऊंचाई होगी कम; मुआवजा बढ़ाने का भी आश्वासन

मध्य प्रदेश सरकार किसानों के आगे एक बार फिर झुक गई है। सरकार ने उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर रोड की ऊंचाई कम करने का फैसला हुआ है। भोपाल में सीएम मोहन यादव और किसानों के बीच बातचीत के बाद सरकार ने निर्णय लिया है। इसके साथ ही किसानों को मिलने वाले मुआवजे की राशि भी बढ़ाने का भी आश्वासन मिल गया है। फैसले के बाद किसानों ने भी अपना विरोध वापस ले लिया है। तीन महीने पहले सरकार ने उज्जैन सिंहस्थ इलाके में जमीन अधिग्रहण का अपना फैसला भी वापस ले लिया था। अब एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर सड़क बनेगी- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। किसानों के सुझाव के अनुसार, उनके हित में इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन प्रोजेक्ट जमीनी स्तर पर बनाया जाएगा। सरकार और प्रशासन उन किसानों को उचित मुआवजा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनकी जमीन प्रभावित होगी। इंदौर और उज्जैन के किसान प्रतिनिधियों ने किसानों के हित में इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन रोड बनाने के उनके फैसले के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार जताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह पुराना इंदौर-उज्जैन रास्ता जानापाव आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन हब का भी काम करता है। हाल के सालों में सड़क के संकरे होने से जो हादसे हुए हैं। अब उन पर रोक लगेगी। किसानों से बातचीत के बाद इस ग्रीनफील्ड फोर-लेन रोड प्रोजेक्ट पर काम तेज किया जा रहा है। एक हजार किसान करने वाले थे उज्जैन कूच उज्जैन-इंदौर और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड रोड का विरोध कर रहे करीब 1,000 किसान बुधवार को राशन और बिस्तर लेकर उज्जैन पहुंचने वाले थे। वे 150 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ कलेक्ट्रेट घेरने और अनिश्चितकालीन धरना देने की तैयारी कर रहे थे। इस बीच मुख्यमंत्री ने किसानों को मिलने और बातचीत करने के लिए बुलाया। हाल ही में यह दूसरी बार है जब सरकार किसानों के आगे झुकी है। इससे पहले, उज्जैन लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा था। किसानों ने प्रदर्शन टाला किसान नेता राजेश सोलंकी ने कहा कि किसानों ने अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी की थी, लेकिन प्रशासन के बातचीत शुरू करने के बाद विरोध कुछ समय के लिए रोक दिया गया। मीटिंग का नतीजा अच्छा रहने के बाद, किसान नेताओं ने दूसरे किसानों को उज्जैन में घुसने से रोक दिया। उन्होंने बताया कि कलेक्टर ने भरोसा दिलाया था कि जावरा-उज्जैन ग्रीन फील्ड रोड से प्रभावित किसानों को उज्जैन-इंदौर रोड के किसानों जितना ही मुआवजा मिलेगा। डेढ़ साल से विरोध कर रहे थे किसान किसानों का कहना है कि वे पिछले डेढ़ साल से मुआवजे और सड़क के एक्सेस कंट्रोल प्लान का विरोध कर रहे हैं। 15 से 20 फीट की ऊंचाई पर बनने वाली प्रस्तावित सड़क से गांव की कनेक्टिविटी पर असर पड़ेगा। किसानों की मांग है कि सड़क जमीन के लेवल पर बनाई जाए और जमीन का मुआवजा बाजार रेट पर दिया जाए। उज्जैन के 7 और इंदौर के 21 गांव प्रभावित उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने किसान नेताओं के साथ मीटिंग की। किसानों के साथ बातचीत पॉजिटिव रही। उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में उज्जैन के 7 और इंदौर के 21 गांव प्रभावित हैं। वहीं उज्जैन-जवार ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में उज्जैन के 53 और रतलाम के 9 गांव प्रभावित हैं। ……………………. ये खबर भी पढ़ें… उज्जैन सिंहस्थ के लिए अब लैंड पूलिंग नहीं होगी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मोहन सरकार ने उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट लागू नहीं होगा। किसानों और भारतीय किसान संघ के लगातार विरोध के बाद सरकार ने यह योजना पूरी तरह वापस ले ली है। इसका सीधा मतलब ये है कि किसी भी किसान की जमीन का स्थायी अधिग्रहण नहीं होगा।पूरी खबर पढ़ें

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