इंदौर-खंडवा नेशनल हाईवे पर एक निर्माणाधीन पुलिया का स्लैब गिरने का मामला सामने आ चुका है। दैनिक भास्कर की खबर के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मामले में संज्ञान लिया और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के एक्सपर्ट की टीम को मौके पर भेजा है। शुक्रवार को पुल की जांच के लिए आई टीम ने जांच की। उन्होंने बताया कि पुल की गुणवत्ता जांचने के लिए एनडीटी टेस्ट कराया जा रहा है, जिसके लिए डेटा कलेक्ट किया जा रहा है। इधर, स्लैब गिरने को लेकर जांच दल के सामने हाईवे प्रशासन एनएचएआई और ठेकेदार ने अलग-अलग तर्क दिए हैं। एनएचएआई के अफसरों ने कहा कि एक ओवरलोड ट्रक धंस गया था, जिसे निकालने के दौरान पुल की स्लैब पर गड्ढा करना पड़ गया है। वहीं निर्माण कंपनी (ठेकेदार) के मैनेजर ने कहा कि स्लैब डलने के बाद उसमें हल्की सी दरार आ गई थी। जिसे ठीक करने के लिए उस हिस्से को तोड़ दिया गया और फिर दोबारा उस हिस्से में स्लैब डाली गई। इसकी जानकारी एनएचएआई के अफसरों को दी गई थी। अब अलग-अलग तर्क सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया हैं। जांच दल के अफसर बोले- डेटा कलेक्ट कर रहे
नेशनल हाईवे का पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद एनएचएआई ने मंत्रालय स्तर से जांच के निर्देश दिए। जिसके बाद इंदौर के एसजीएसआईटीएस कॉलेज के सिविल डिपार्टमेंट को चिट्ठी लिखी गई। इस सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के सिविल डिपार्टमेंट ने मंत्रालय से फीस अदायगी और फिर जांच के लिए टीम बनाई। सीनियर प्रोफेसर मिलिंद कुमार लघाटे की अध्यक्षता में टीम ने शुक्रवार को ग्राम बासवां के पास खिड़किया नदी पर निर्माणाधीन पुल का जायजा लिया। जांच दल के साथ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और निर्माण कंपनी के अधिकारी भी मौजूद रहे। जांच के दौरान पुल के ऊपरी और निचले हिस्से दोनों को बारीकी से देखा गया। पुल के नीचे क्रेन मशीन की मदद से जांच दल ने बारीकी से स्लैब और मटेरियल की गुणवत्ता देखी। उन्होंने पुल क्षतिग्रस्त होने की वजह भी प्रोजेक्ट अफसरों से पूछी और एक-एक पाइंट पर बातचीत के साथ सैंपल भी जुटाए। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान प्रोफेसर ने मिलिंद कुमार लघाटे ने कहा कि, इस बारे में उनके विभाग से जांच के लिए कहा गया था। फिलहाल मौके पर आकर टेस्टिंग कर रहे है। टेस्टिंग के जरिए पूरी टीम डेटा कलेक्ट कर रही है। इस प्रोसेस के बाद ही रिजल्ट पर कुछ कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि पहले डेटा तैयार होता है, जांच फैकल्टी बैठकर अपने-अपने लॉजिक देती है, उस हिसाब से रिपोर्ट तैयार होती है। यह एनडीटी टेस्ट का हिस्सा है। अब जानिए, क्या होता है एनडीटी टेस्ट
NDT यानी नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग। इसे ‘अविनाशी परीक्षण’ भी कहा जाता है। यह टेस्ट आधुनिक इंजीनियरिंग की एक ऐसी ‘जादुई’ तकनीक है, जिससे बिना एक भी हथौड़ा चलाए या बिना कंक्रीट को तोड़े, यह पता लगाया जा सकता है कि पुल कितना मजबूत है। जिस तरह डॉक्टर हमारे शरीर के अंदरूनी हिस्सों की बीमारी का पता लगाने के लिए बिना चीर-फाड़ किए एक्स-रे, सीटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड करते हैं, ठीक उसी तरह इंजीनियर भी पुलों, पिलर, बीम और एक्सप्रेसवे की सेहत जांचने के लिए NDT का इस्तेमाल करते हैं। इस टेस्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बनी-बनाई सड़क या पुल को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। जांच के तुरंत बाद भी उस पर गाड़ियां पहले की तरह दौड़ सकती हैं। इस टेस्ट के दौरान रिबाउंड हैमर टेस्ट, अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी टेस्ट, जीपीआर, हाफ-सेल पोटेंशियल टेस्ट जैसी मशीनें और प्रक्रियाएं हिस्सा होती है। 10 एमएम का सरिया, 4 इंच की कांक्रीट दिखी थी
दो हफ्ते पहले ब्रिज का कांक्रीट गिरने से स्लैब बाहर आ गई थी। वहां एक बड़ा गड्ढा हो गया था। इससे सामने आया कि ब्रिज की स्लैब बनाने में महज 10 एमएम (10 MM) मोटाई के सरिये का इस्तेमाल हुआ और कांक्रीट सिर्फ चार इंच थी। प्रोजेक्ट की लागत 3900 करोड़ रुपए
भारतमाला परियोजना के तहत 203 किलोमीटर वाले इंदौर-एदलाबाद नेशनल हाईवे के निर्माण की कुल लागत 3900 करोड़ रुपए है। वहीं ब्रिज धंसने वाले धनगांव से बलवाड़ा प्रोजेक्ट के 40 किलोमीटर हाईवे की लागत 1001.69 करोड़ रुपए है। इसमें 12.75 किलोमीटर लंबा नर्मदा नदी पर बनने वाला ब्रिज भी शामिल है। नागपुर की पेटी कॉन्ट्रैक्टर कंपनी के पास है ठेका
इंदौर-एदलाबाद नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट कुल 203 किलोमीटर का है। इसमें से खरगोन के बलवाड़ा और खंडवा के धनगांव के बीच 39 किलोमीटर के हिस्से का ठेका जीएचवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (GHV India) को मिला है। जीएचवी ने यह काम आगे पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिया है। जिसमें नर्मदा नदी पर ब्रिज निर्माण मंगलम बिल्डकॉन कंपनी और सड़क और अन्य ब्रिज निर्माण नागपुर की केदारेश्वर कंपनी (केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के संसदीय क्षेत्र की कंपनी) को मिला।
