राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत उत्खनन के मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि हालिया जांच में नए या ताजा खनन के कोई सबूत नहीं मिले हैं। सरकार ने कहा कि हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में जिन गड्ढों का जिक्र किया गया था, वे पुराने खनन के कारण बने थे और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद वहां नया उत्खनन नहीं हुआ। सरकार ने यह भी बताया कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, 44 वाहन जब्त किए गए हैं और 8 वाहनों को राजसात किया जा चुका है। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार 29 मई को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई की। 26 मई को दिए गए निर्देशों के बाद मध्यप्रदेश सरकार की ओर से ग्वालियर सर्किल के वन संरक्षक ने शपथपत्र दाखिल किया। इसमें बताया गया कि समाचार रिपोर्ट में जिन स्थानों का उल्लेख था, वहां निरीक्षण कराया गया। जांच में नए खनन के कोई संकेत नहीं मिले। ड्रोन तस्वीरों का दिया हवाला
सरकार ने कोर्ट को बताया कि अप्रैल 2026 के दूसरे सप्ताह से ड्रोन कैमरों के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है। इन्हीं तस्वीरों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि संबंधित स्थानों पर कोर्ट के निर्देशों के बाद कोई नया उत्खनन नहीं हुआ। हलफनामे में कहा गया कि जिन ट्रैक्टरों में रेत परिवहन होती दिखाई दी, वह संभवतः व्यापारियों के रेत डंप में पहले से संग्रहित सामग्री थी। हालांकि सरकार ने ऐसे व्यापारियों के खिलाफ अवैध भंडारण और परिवहन को लेकर कार्रवाई प्रस्तावित होने की जानकारी भी कोर्ट को दी। 12 गिरफ्तार, 44 वाहन जब्त, सख्त निगरानी का भरोसा दिया
मध्यप्रदेश सरकार ने बताया कि बिना पंजीकरण वाले वाहनों और अवैध खनन से जुड़े मामलों में कई एफआईआर और प्रारंभिक अपराध प्रतिवेदन दर्ज किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 44 वाहन जब्त किए गए हैं, जबकि 8 वाहनों को राजसात किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी जाएगी और आगे किसी भी प्रकार का अवैध रेत उत्खनन नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि निगरानी और पर्यवेक्षण से जुड़े जरूरी कदम तेजी से पूरे किए जाएंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था
सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई को हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन जारी है। इससे पहले कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा था कि चंबल में अवैध खनन संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। अदालत ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के संचालन, वन विभाग में खाली पदों, निगरानी की कमी और पर्यावरणीय नुकसान पर गंभीर चिंता जताई थी। राज्यों को CCTV निगरानी बढ़ाने, अवैध खनन में शामिल वाहनों की जब्ती, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और हर दो महीने में प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। अगली सुनवाई 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 22 जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। तब तक मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश सरकारों के साथ केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) को भी ताजा तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
