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CM ने मंत्रियों से पूछा-हारी विधानसभा सीटों पर क्या किया:ढाई साल में पूरे वादों का हिसाब मांगा, वन-टू-वन में निकाय चुनाव-बूथ मैनेजमेंट पर चर्चा

मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के अगले महीने 13 जून को ढाई साल पूरे होने वाले हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को सीएम हाउस में 20 मंत्रियों के साथ वन-टू-वन चर्चा की। बैठक में हारी हुई विधानसभा सीटों की स्थिति, निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारी को लेकर चर्चा हुई। बूथ मैनेजमेंट, चुनावी वादों की प्रगति, विभागीय कामकाज और प्रभार वाले जिलों में संगठन की स्थिति को लेकर फीडबैक लिया गया। बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। खंडेलवाल ने बताया कि बचे हुए मंत्रियों के साथ सोमवार को वन-टू-वन बैठक होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार पर कोई चर्चा नहीं हुई है। अभी फोकस मंत्रियों के कामकाज और उनके प्रभार वाले जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा पर है। हारी सीटों और कमजोर बूथों पर फोकस मंत्रियों से उनकी विधानसभा, गृह जिले और प्रभार वाले जिलों की राजनीतिक स्थिति पूछी गई। खासतौर पर हारी हुई विधानसभा सीटों पर फोकस किया गया। कमजोर बूथों, विरोधी दलों की गतिविधियों, विकास कार्यों की स्थिति और अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई। निकाय चुनाव- संगठनात्मक गतिविधियों पर फीडबैक आगामी नगर पालिका और ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर मंत्रियों से चर्चा हुई। उनसे पूछा गया कि उनके प्रभार वाले जिलों में कौन-सी सीटें मजबूत और कमजोर हैं। प्रत्याशी चयन, बूथ स्तर की तैयारी और चुनावी रणनीति को लेकर भी फीडबैक लिया गया। मंत्रियों से यह भी पूछा गया कि उनके प्रभार वाले जिलों में कितने प्रवास हुए, संगठन की बैठकों और कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी कैसी रही और स्थानीय संगठन के साथ उनका समन्वय कैसा है। संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों ने इन विषयों पर उनसे चर्चा की। वादों, योजनाओं और विभागीय कामकाज की समीक्षा मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से विभागीय कामकाज की समीक्षा भी की। उन्होंने पूछा कि उनके जिलों में स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ियों की स्थिति कैसी है, वे वहां नियमित दौरे करते हैं या नहीं और सरकार की योजनाओं का जमीनी असर कितना दिखाई दे रहा है। गेहूं खरीदी समेत अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बैठक में चुनाव के समय किए गए वादों और सरकार की प्राथमिकताओं पर विभागों की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्रियों ने अपने विभागों की उपलब्धियों, नई पहलों और अब तक किए गए कार्यों की जानकारी दी। मंत्रियों से पूछा-प्रभार वाले जिले में कितने दौरे मुख्यमंत्री की प्रमुख योजनाओं — लाड़ली बहना, मुख्यमंत्री किसान कल्याण, गृह प्रवेश और मेरा घर योजना — में मंत्रियों की भागीदारी, प्रचार-प्रसार और जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्रियों से यह भी पूछा गया कि उन्होंने अपने प्रभार वाले जिलों में कितने दौरे किए, कितनी बैठकें लीं, किन विकास कार्यों की समीक्षा की और क्या निर्णय लिए। भ्रमण रिपोर्ट की भी समीक्षा हुई। समितियों, निगम-मंडलों पर भी चर्चा मंत्रियों से प्रभार वाले जिलों में अशासकीय समितियों के गठन की स्थिति भी पूछी गई। दिशा समिति, जनभागीदारी समिति, जिला स्तरीय समन्वय समिति और मॉनिटरिंग कमेटियों के गठन और उनकी कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई। बैठक में विभागों के अंतर्गत आने वाले निगम, मंडल और बोर्ड में हाल ही में नियुक्त अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों के प्रशिक्षण और समन्वय को लेकर भी चर्चा हुई। राज्यमंत्रियों के अधिकार बढ़ाने का मुद्दा उठा खंडेलवाल ने बताया कि निगम-मंडल अध्यक्षों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया है। मुख्यमंत्री उन्हें जनता से बेहतर समन्वय, व्यवहार और संगठन से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। जिन मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री हैं, उनसे कार्य विभाजन को लेकर जानकारी ली गई। फिलहाल राज्यमंत्रियों के पास तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादलों के अधिकार हैं। बैठक में उनके अधिकार बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्रिमंडल के विस्तार पर कोई चर्चा नहीं खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा देने की बात कही गई थी। इसी के तहत रविवार रात साढ़े 9 बजे कोर कमेटी की बैठक भी वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जा रही है। पहले दिन देवड़ा नहीं पहुंच सके, बाकी मंत्रियों से चर्चा उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सबसे पहले समत्व भवन पहुंचे। उनके बाद विजय शाह, कृष्णा गौर, राव उदय प्रताप सिंह, प्रहलाद पटेल, करण सिंह वर्मा और गोविंद सिंह राजपूत पहुंचे। शाम को विश्वास सारंग, इंदर सिंह परमार, नारायण सिंह पंवार और गौतम टेटवाल पहुंचे। देर शाम संपतिया उइके, कैलाश विजयवर्गीय, निर्मला भूरिया, लखन पटेल और दिलीप जायसवाल पहुंचे। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा अस्वस्थ होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। वहीं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर बिना पायलट गाड़ी के खुद ई-स्कूटी चलाकर मुख्यमंत्री आवास पहुंचे।

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