Homeमध्यप्रदेशतपती धूप में पंच धूनी रमाकर तप कर रहे संत:उज्जैन के निनोरा...

तपती धूप में पंच धूनी रमाकर तप कर रहे संत:उज्जैन के निनोरा में अदभुत नजारा, 40 डिग्री तापमान में धुआं और तपन के बीच कर रहे जाप

सिंहस्थ कुंभ में अभी भले ही दो साल का समय बाकी हो, लेकिन धर्मनगरी उज्जैन में अभी से कुंभ जैसा माहौल दिखाई देने लगा है। देश के प्रसिद्ध संत टाटम्बरी सरकार (श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर रामदास जी त्यागी) अपने करीब 20 संतों के साथ उज्जैन पहुंचे हैं। संत तपती गर्मी के बीच सिर पर पात्र रखकर बैठे हैं, जिनमें कंडे धधक रहे हैं। वे चारों ओर धूनी रमाकर कठोर तपस्या कर रहे हैं। संतों के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके ठहराव स्थल पहुंच रहे हैं। निनोरा निवासी सोनू शर्मा के खेत में नर्मदा पुराण कथा चल रही है, संत इसी आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं। संत 40 डिग्री के तापमान में पंच धूनी के बीच बैठकर जाप कर रहे हैं। जहां आम लोगों के लिए दोपहर में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है, वहीं संत खुले आसमान के नीचे साधना में लीन हैं। चार माह चलेगी विशेष अनुष्ठान ध्रुव दास त्यागी ने बताया कि सभी संत रोजाना तड़के तीन बजे उठ जाते हैं। पूजा-पाठ और दैनिक कार्यों के बाद संत धूनी रमाकर तपस्या शुरू करते हैं। उन्होंने बताया कि संसार के कल्याण के लिए यह विशेष अनुष्ठान चार माह तक चलेगा, जिसका समापन गंगा दशहरा पर किया जाएगा। आयोजक सोनू शर्मा के मुताबिक संत टाटम्बरी सरकार वर्ष 1992 से निनोरा में धार्मिक आयोजन करते आ रहे हैं। इस बार वे नर्मदा पुराण कथा में शामिल होने पहुंचे हैं। 3 मई से शुरू हुई कथा का समापन शनिवार को होगा। शाम को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु शामिल होंगे। सबसे कम उम्र के महामंडलेश्वर भी पहुंचे प्रयागराज कुंभ में महज 18 वर्ष की उम्र में सियाराम दास महाराज को महामंडलेश्वर की उपाधि मिली थी। उन्हें देश के सबसे कम उम्र के महामंडलेश्वर के रूप में देखा जाता है। पदवी मिलने के बाद उनका नाम महामंडलेश्वर सियाराम दास हो गया। बताया जाता है कि 13 साल की उम्र में ही उन्होंने घर-परिवार छोड़कर संन्यास जीवन अपना लिया था। टाटम्बरी बाबा ने बनाया उत्तराधिकारी महामंडलेश्वर सियाराम दास मूल रूप से मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं। किशोरावस्था में ही वे दिगंबर अनी अखाड़े के श्रीमहंत सियाराम दास महाराज टाटम्बरी बाबा के शिष्य बन गए थे। कम उम्र में ही सनातन परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा का ज्ञान प्राप्त करने वाले सियाराम दास को टाटम्बरी बाबा ने अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया है। महज 19 वर्ष की उम्र में लंबी जटाओं और साधु वेश में वे श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here