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इंदौर में लसूड़िया के बाद अब बाणगंगा पुलिस कटघरे में:रात 12 बजे बुजुर्ग किसान के घर दबिश देकर समझौते का बनाया दबाव, हाईकोर्ट पहुंचे फरियादी

इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लसूड़िया थाने के बाद अब बाणगंगा थाना पुलिस पर एक 64 वर्षीय बुजुर्ग को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अनुचित दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। मामले में बाणगंगा क्षेत्र निवासी जसराज मेहता ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की है। बाणगंगा क्षेत्र के रहने वाले पेशे से किसान 64 वर्षीय जसराज मेहता का आरोप है कि पुराने जमीन विवाद के नाम पर पुलिस लगातार उन्हें थाने बुलाकर समझौता करने और पैसे लौटाने का दबाव बना रही है। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुलिस कमिश्नर और डीसीपी जोन-3 को नोटिस भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। फरियादी के मुताबिक कुछ लोगों ने उनके खिलाफ अवैध कॉलोनाइजेशन की झूठी शिकायत की है, जबकि बाणगंगा क्षेत्र में उनके नाम कोई जमीन ही नहीं है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने कई बार बयान के लिए बुलाया, लेकिन तीन बार थाने पहुंचने के बावजूद उनका बयान दर्ज नहीं किया गया। आरोप है कि इस दौरान उन पर मानसिक दबाव बनाया गया और शिकायत की कॉपी तक उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं थाना बाणगंगा के कुछ पुलिसकर्मियों पर भी पक्षपात करने के आरोप लगाए गए हैं। बेटी के प्लॉट पर कब्जे का आरोप जसराज मेहता ने दावा किया कि उनकी बेटी के प्लॉट पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। इस मामले में भी वे अलग से कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। नोटिस में कुछ लोगों और थाना बाणगंगा के पुलिसकर्मियों पर मिलीभगत और पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं। वकील की ओर से भेजे गए नोटिस में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए। लेकिन पुलिस की और से जब कोई उचित कार्यवाई नहीं हुई तो फरियादी ने कोर्ट की शरण ली है। समझौता करो और पैसे लौटाओ याचिका में कहा गया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने 15 से 20 साल पुराने कथित प्लॉट बिक्री मामले में शिकायत की थी, जबकि फरियादी का कहना है कि उन्होंने कभी कोई प्लॉट बेचा ही नहीं। इसके बावजूद पुलिस लगातार उन्हें थाने बुलाती रही। याचिका के अनुसार 2 अप्रैल 2026 को थाना पहुंचने पर यह कहकर बयान नहीं लिया गया कि थाना प्रभारी छुट्टी पर हैं। बाद में समय मांगने का आवेदन लिखवाया गया। इसके बाद 19 अप्रैल को फिर बुलाया गया, लेकिन तब भी बयान दर्ज नहीं किया गया। फरियादी का आरोप है कि बयान दर्ज करने के बजाय पुलिस समझौता करने और पैसे लौटाने का दबाव बना रही थी। उनका यह भी आरोप है कि पुलिस कुछ लोगों का पक्ष लेकर काम कर रही है। आधी रात घर पहुंचे पुलिसकर्मी सबसे गंभीर आरोप 20 अप्रैल की रात का है। जसराज मेहता के मुताबिक रात करीब 12 बजे आठ पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और कहा कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है तथा उन्हें गिरफ्तार करने आए हैं, जबकि उस समय तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड है। फरियादी ने बताया कि वे बुजुर्ग हैं और कई बीमारियों से जूझ रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस लगातार मानसिक दबाव बना रही है। उन्होंने पुलिस आयुक्त और डीसीपी को भी शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिवक्ता बोले- लगातार रात में पहुंच रही थी पुलिस अधिवक्ता अजय मिश्रा ने बताया कि उनका पक्षकार स्वयं बयान देने थाने जा रहा था, लेकिन थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर द्वारा पुलिसकर्मियों को भेजकर उसे डराने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास लगातार तीन दिनों के सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं, जिनमें पुलिसकर्मी रात 1 बजे से 2 बजे के बीच घर के बाहर आते-जाते दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों में देखें पुलिस फरियादी के घर पहुंची ये खबर भी पढ़ें… पुलिस ने तस्करों को फाइव स्टार होटल में बंधक बनाया इंदौर के विजय नगर थाने के चार पुलिसवालों ने वर्दी को वसूली का हथियार बना लिया। आगर मालवा के बड़ौद से एक ड्रग तस्कर को उठाकर लाए, उसे थाने ले जाने के बजाय शहर के एक आलीशान 5-स्टार होटल में दो दिन तक बंधक बनाकर रखा और 5 लाख रुपए की वसूली की। पढ़ें पूरी खबर…

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