सागर जिले की रहली तहसील के ग्राम किशनगढ़ में हुई सगाई समाज के लिए मिसाल बनी। 25 अप्रैल को दूल्हे के पिता कमलेश पटेल ने लगुन (फलदान) में मिले 1.21 लाख रुपए कैश लौटा दिए। परिवार ने शगुन में सिर्फ 11 रुपए और एक नारियल लेकर विवाह की रस्में पूरी की। सरपंच मायारानी और कमलेश पटेल के बड़े बेटे गुड्डू का विवाह 26 अप्रैल को साधना पटेल से हुआ है। साधना के पिता सागर के तिली क्षेत्र के रहने वाले हैं और ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी तीन बेटियों में साधना दूसरे नंबर की है। 11 रुपए और नारियल लिए, बाकी रकम लौटाई शादी तय होने के बाद लगुन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें दुल्हन के पिता 1.21 लाख रुपए कैश और अन्य सामान लेकर दूल्हे गुड्डू के घर पहुंचे थे। पारंपरिक ढंग से जब फलदान में नगद राशि दूल्हे को दी गई, तो उसने लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद दूल्हे के पिता ने 11 रुपए और नारियल लेकर बाकी राशि दुल्हन के पिता को लौटा दी। पिता बोले- ठान रखा था कि मैं दहेज नहीं लूंगा दूल्हे गुड्डू पटेल के पिता कमलेश पटेल ने बताया कि उनके दो बेटे हैं, बेटी नहीं है। उनका शुरू से विचार था कि वे बहू के रूप में बेटी लाएंगे। कमलेश ने कहा, “कई अच्छे संस्कारी परिवार सिर्फ दहेज के डर से रिश्ता नहीं कर पाते। इसलिए मैंने ठान लिया था कि बेटे की शादी में एक रुपया दहेज नहीं लूंगा।” पैसे लौटाने पर घबरा गए थे समधी, लगा नाराज हैं कमलेश पटेल ने बताया कि जब उन्होंने राशि लौटाई, तो समधी घबरा गए और उन्हें लगा कि वे नाराज हैं। लेकिन बात समझाने पर वे भावुक हो गए। कमलेश ने कहा, “शादी रिश्ता है, सौदा नहीं। मुझे बेटी मिल गई और समधी को बेटा। यह राशि वे अपनी छोटी बेटी की पढ़ाई में लगाएंगे, तो उसके भविष्य के काम आएगी।” ये खबर भी पढ़ें… दूल्हे ने सगाई में लौटाया 50 लाख का दहेज उज्जैन जिले में सगाई समारोह में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल देखने को मिली। बड़नगर तहसील के बंगरेड गांव में दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से इनकार कर करीब 50 लाख रुपए की पेशकश लौटा दी। फैसले की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। पढ़ें पूरी खबर…
