प्रदेश के 55 पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रवेश के वक्त वादा किया गया था कि घर या हॉस्टल के नजदीकी रूट से बस से कॉलेज लाने और वापस छोड़ने की सुविधा सिर्फ एक रुपया प्रतिदिन के नाममात्र शुल्क पर दी जाएगी। इसी सुविधा के नाम पर उच्च शिक्षा विभाग ने 2.86 लाख विद्यार्थियों से प्रति छात्र सालाना 300 रु के हिसाब से कुल 8 करोड़ 58 लाख की भारी-भरकम वसूली भी कर ली। लेकिन स्थिति यह है कि 99% छात्रों के लिए बसें हैं ही नहीं। भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 55 एक्सीलेंस कॉलेजों के लिए महज़ 48 बसें ही उपलब्ध हैं। इनमें से 11 जिले तो ऐसे हैं, जहां एक भी बस नहीं है। एक बस की मानक क्षमता 55 सीटों की होती है। रूट और समय की पाबंदी के कारण बसें एक ही फेरा लगा पाती हैं। पूरे प्रदेश की 48 बसों की कुल क्षमता जोड़ें तो एक फेरे में अधिकतम 2,640 छात्र ही सफर कर पाते हैं। जबकि फीस 2.86 लाख छात्रों से ली गई है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का कहना है कि बस संचालन के लिए कोई अनुदान नहीं मिलता है। अभी बसों की कमी है। भविष्य में बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। छात्रों के साथ ‘एक्सीलेंस’ धोखा 1. 11 जिलों में बस ही नहीं, फिर भी 1.19 करोड़ वसूले 11 जिले (भिंड, हरदा, शिवपुरी, मंदसौर, बुरहानपुर, शाजापुर, कटनी, रतलाम, नीमच, मैहर, उमरिया) ऐसे हैं जहां कॉलेजों के पास एक भी बस उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद इन जिलों के 39 हजार 745 विद्यार्थियों से 1.19 करोड़ रुपये फीस वसूल ली गई। बिना सेवा दिए छात्रों की जेब से यह राशि किस नियम के तहत काटी गई इसका जवाब अफसरों के पास नहीं है। 2. गुना में 11 हजार 748 छात्रों पर 55 सीटर एक बस गुना: यहां कॉलेज में 11,748 विद्यार्थी दर्ज हैं, जिनसे 35.24 लाख रुपए वसूले गए। लेकिन बस सिर्फ 1 है। दतिया और टीकमगढ़: दतिया (7,500 छात्रों से 22.50 लाख वसूले) और टीकमगढ़ (6,000 छात्रों से 18 लाख वसूले) में भी इतने बड़े छात्र समूह के बीच महज़ 1-1 बस चलाकर रस्म अदायगी की जा रही है। 3. प्राचार्य लाचार: फीस सब दे रहे, सुविधा सिर्फ 1% को
नर्मदापुरम के पीएमश्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार चौकसे बताते हैं कि कॉलेज में 6,500 छात्रों से बस शुल्क लिया है। हमारे पास 2 बसें हैं जो माखननगर और इटारसी से आती हैं। फायदा सिर्फ 110 बच्चों को मिल रहा है। सीहोर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. योनिश खान कहते हैं कि 3,500 विद्यार्थियों से शुल्क लिया है, लेकिन सफर सिर्फ 55 छात्र ही कर पाते हैं। राजगढ़ में भी लगभग यही हाल है। तीन सबसे बड़े सवाल 1 वादा करके बसें क्यों नहीं दीं? छात्रों से पैसे वसूले गए, तो सुविधा क्यों नहीं दी जा रही? 2 जहां बसें नहीं, वहां का पैसा कहां जमा है? क्या यह राशि छात्रों को लौटाई जाएगी? 3 जब विभाग को पता था कि सिर्फ 48 बसें ही चल सकती हैं, तो सभी छात्रों से फीस क्यों ली?
