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जम्मू-कश्मीर में सरकार गिरने का खतरा:25 विधायकों का फारूक-उमर को अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानीं तो आज ही इस्तीफा दे सकते हैं; श्रीनगर में आखिरी बैठक

जम्मू-कश्मीर में सीएम उमर अब्दुल्ला की सरकार गिर सकती है। 25 नाराज विधायकों ने उमर और पार्टी प्रेसिडेंट फारूक अब्दुल्ला को मांगें पूरी करने के लिए अल्टीमेटम दे दिया है। आज सुबह करीब 10 बजे श्रीनगर में विधायकों के साथ उमर और फारूक की आखिरी बैठक होगी। भास्कर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अगर विधायकों की मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो सभी शुक्रवार को विधायकी से इस्तीफा दे सकते हैं। विधायकों ने सीएम के सलाहकार नासिर सोगमी को पद से हटाने, डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी से सड़क निर्माण विभाग वापस लेने या उन्हें पद से हटाने और सरकार के लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच जैसी मांगें रखी हैं। इस बीच नाराज विधायकों ने 5 सीक्रेट बैठकें भी कीं। इस दौरान विधायकों ने मांगों और पार्टी से बातचीत की रणनीति बनाई। श्रीनगर से सांसद मेहंदी ने भी नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ी नेशनल कॉन्फ्रेंस से श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहंदी ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा- यह आजादी का फैसला है। मैं एक शहीद की विरासत और पाक खून की नस्ल का प्रतिनिधित्व करता हूं। मैं अपनी आजादी के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर रहा हूं। आज दोपहर 2:40 बजे से मैं नेशनल कॉन्फ्रेंस का हिस्सा नहीं हूं। कैबिनेट विस्तार में कई दावेदारों को नहीं मिली जगह 27 अक्टूबर के कैबिनेट विस्तार में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 4 विधायक अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू मंत्री बनाए गए। वहीं, निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। इस विस्तार में कई ऐसे वरिष्ठ विधायक मंत्री नहीं बन सके, जिनके नाम की चर्चा थी। इनमें नजीर अहमद गुरेजी और मुबारक गुल भी शामिल हैं। मुबारक गुल को बाद में फारूक अब्दुल्ला ने अली मोहम्मद सागर की जगह पार्टी का महासचिव नियुक्त किया। 5 साल में देश की 3 बड़ी क्षेत्रिय पार्टियों में टूट हुई… शिवसेना: जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी और पार्टी के ज्यादातर विधायकों को अपने साथ ले लिया। शिंदे ने कांग्रेस-NCP से गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में नई सरकार बना ली। बाद में चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के गुट को ही असली शिवसेना मानकर उन्हें पार्टी का नाम और ‘तीर-कमान’ चुनाव चिह्न दे दिया। एनसीपी: जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत कर दी जिससे पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। अजित पवार अपने समर्थक विधायकों को लेकर महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए और सरकार में मंत्री बन गए। टीएमसी: 2026 में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में भी एक बड़ी टूट हुई। रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधायकों और सांसदों का एक बड़ा बागी गुट ममता बनर्जी से अलग हो गया। इसके चलते चुनाव आयोग ने टीएमसी का नाम और पुराना चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया और दोनों गुटों को अलग-अलग नए नाम दे दिए। —————– यह खबर भी पढ़ें…. फारूक बोले- पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा उठाकर हमें बचा रहा जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सरकार हमारी मदद नहीं कर सकती। हमारे पड़ोसी को देखिए वह हर जगह कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है। वह हमें बचा रहा है, वरना हमारी सरकार की नीयत ठीक नहीं है। पूरी खबर पढ़ें

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