श्राद्ध पक्ष आज से शुरू हो रहा है। 16 दिन तक श्रद्धालु पितरों का तर्पण-पिंडदान करेंगे। श्राद्ध की दृष्टि से यह साल खास है। 1966 में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति और शनि समेत 6 ग्रहों के पुनरावृत्ति योग में महालय श्राद्ध हुआ था। इसके 60 साल बाद यह विशेष योग फिर बना है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शुभकारी है। वहीं, उज्जैन के सिद्धवट क्षेत्र के तीर्थ पुरोहितों के पास 150 साल से अधिक पुरानी पोथियां हैं। इनमें परिवारों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी जानकारी दर्ज है। श्रद्धालु अपना प्रदेश, शहर, कस्बा, गोत्र और जाति बताते हैं। इसके आधार पर पुरोहित एक मिनट से कम समय में संबंधित परिवार की वंशावली निकाल लेते हैं। इसमें पूर्वजों के नाम, पते और परिवार से कौन-कब उज्जैन पूजन के लिए आया, जैसी जानकारी दर्ज है। श्राद्ध पक्ष में देशभर से श्रद्धालु सिद्धवट घाट पहुंचते हैं। यहां पितरों के लिए तर्पण-पिंडदान किया जाता है और सिद्धवट मंदिर में प्राचीन वटवृक्ष का पूजन किया जाता है। पोथी में होता है पूर्वजों के नाम का उल्लेख पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध की विधि में कुल और पूर्वजों के नाम का उल्लेख किया जाता है। कई पीढ़ियों के नाम याद रखना आम लोगों के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में तीर्थ पुरोहितों के पास मौजूद पोथियां इसमें मदद करती हैं। उज्जैन के कई तीर्थ पुरोहितों के पास अलग-अलग परिवारों के पूर्वजों के नामों का रिकॉर्ड है। पुरोहितों के अनुसार, इन पोथियों में करीब 150 साल पुराने रिकॉर्ड भी मिलते हैं। जजमान अपने शहर, कस्बे, प्रदेश, गोत्र और जाति की जानकारी देकर पूर्वजों के नाम और वंशावली पता कर सकते हैं। पितरों की मुक्ति से जुड़ा सिद्धवट क्षेत्र पंडित राजेश त्रिवेदी ने बताया कि उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी के साथ तर्पण और श्राद्ध के लिए भी जाना जाता है। उनके अनुसार, सिद्धवट क्षेत्र को प्राचीन समय से पितरों की मुक्ति से जोड़ा जाता है। तीर्थ पुरोहितों के पास करीब 150 साल पुराना रिकॉर्ड है। 400 से ज्यादा पंडित करवाते हैं पूजन उज्जैन में श्राद्ध पक्ष के दौरान 12 प्रमुख पंडे पूजन करवाते हैं। इनमें तर्पण, विष्णु पूजा, देव पूजा, ऋषि, मनुष्य और पितृ तर्पण शामिल हैं। इसके अलावा 400 से ज्यादा पंडित रामघाट, सिद्धवट घाट, गया कोठा सहित अन्य स्थानों पर पूजन करवाते हैं। यहां संपत्ति के लिए, संतति-संतान के लिए और सद्गति के लिए श्राद्ध-तर्पण किया जाता है। नहीं पहुंच पाने वालों के लिए ऑनलाइन तर्पण श्रद्धालुओं के उज्जैन नहीं पहुंच पाने की स्थिति में पंडितों ने ऑनलाइन पूजा-पाठ और तर्पण की व्यवस्था भी की है। सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धालु घर बैठे तर्पण की बुकिंग कराते हैं। पंडित सिद्धवट घाट से ऑनलाइन मंत्र पढ़ते हैं, जबकि जजमान घर पर बैठकर पूर्वजों के निमित्त पूजन करते हैं। दान-दक्षिणा भी ऑनलाइन खाते में जमा कराई जाती है। संपत्ति विवाद में कोर्ट में भी मान्यता का दावा तीर्थ पुरोहितों के अनुसार इन पुराने बही खातों में दर्ज जानकारी को संपत्ति से जुड़े विवादों में कोर्ट में भी मान्यता मिली है। भाई-भाई के बीच जायदाद के विवाद में इन बही खातों के आधार पर फैसले होने का दावा किया जाता है।
