लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और उसके बाद घुटनों को हल्का मोड़कर चलना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऑर्थो स्पाइन एंड स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना के अनुसार, लंबे समय तक घुटने मुड़े रहने से चाल का पैटर्न बिगड़ता है। घुटने करीब 5 डिग्री तक मुड़े रहने और पंजे बाहर की ओर करके चलने की स्थिति को आमतौर पर डक वॉकिंग के रूप में देखा जाता है। इससे घुटनों के जोड़ पर असामान्य दबाव पड़ सकता है और लंबे समय में अर्थराइटिस का खतरा बढ़ सकता है। घुटने मोड़कर चलने से कार्टिलेज पर असर डॉक्टर के मुताबिक, घुटने को सीधा रखने पर उसका लॉकिंग मैकेनिज्म शरीर का वजन संभालने में मदद करता है। घुटना लगातार मुड़ा रहने पर यह मैकेनिज्म प्रभावित होता है और जोड़ के अंदर मौजूद कार्टिलेज पर दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर कार्टिलेज को नुकसान पहुंचने से घुटने में दर्द और अर्थराइटिस की समस्या विकसित हो सकती है। अर्थराइटिस बढ़ने पर स्थिति ग्रेड-1 से ग्रेड-4 तक पहुंच सकती है। गंभीर यानी ग्रेड-4 अर्थराइटिस में कई मरीजों को नी रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ती है। 40 की उम्र में भी पहुंच रहे अर्थराइटिस के मरीज डॉ. सक्सेना के अनुसार, पहले अर्थराइटिस के मरीज आमतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र में ज्यादा देखने को मिलते थे। अब कम उम्र में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उनके मुताबिक, करीब 40 वर्ष की उम्र में आने वाले अर्थराइटिस के मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है और हर महीने बड़ी संख्या में ऐसे मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टर का दावा है कि गंभीर यानी ग्रेड-4 अर्थराइटिस के मामलों में भी करीब 60 से 70 फीसदी तक वृद्धि देखने को मिली है। उनका कहना है कि गलत लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठे रहना, एक्सरसाइज की कमी और गलत वॉकिंग पैटर्न इसके पीछे महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं। कैसे चलें- एड़ी पहले, फिर पंजा डॉ. सक्सेना के अनुसार, घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए बैठने के दौरान भी बीच-बीच में पैर को सीधा करना चाहिए। हर दो घंटे में कुछ देर पैर सीधा रखने की एक्सरसाइज की जा सकती है। चलने के दौरान हील-टो पैटर्न अपनाने की सलाह दी गई है। इसमें पहले एड़ी जमीन पर रखी जाती है और इसके बाद पंजा। डॉक्टर के मुताबिक, एक्सरसाइज के तौर पर रोज 10 से 20 कदम इस तरह चलने का अभ्यास किया जा सकता है। इसके अलावा बैठकर पैर को सीधा उठाने की एक्सरसाइज भी करने की सलाह दी गई है। इससे घुटने के आसपास की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं और जोड़ को सपोर्ट मिलता है। घुटने की सही चाल से शरीर का अलाइनमेंट बेहतर डॉक्टर के अनुसार, घुटने को लगातार मोड़कर चलने के बजाय वॉकिंग के दौरान उसे यथासंभव सामान्य तरीके से सीधा रखना चाहिए। एड़ी से पंजे तक सही तरीके से कदम रखने पर शरीर के वजन का वितरण बेहतर तरीके से होता है और घुटने के जोड़ पर अनावश्यक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सही चाल, नियमित एक्सरसाइज और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचना घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। वहीं, अगर गलत वॉकिंग पैटर्न लगातार बना रहता है तो कम उम्र में ही अर्थराइटिस की समस्या सामने आ सकती है और गंभीर मामलों में नी रिप्लेसमेंट तक की जरूरत पड़ सकती है।
