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होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने भी डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में रोड्रिगेज की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत दोनों देशों के सहयोग को और आगे बढ़ाएगी। अमेरिका ने 4 जनवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद से रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। रोड्रिगेज की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। होर्मुज संकट की वजह से भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। वेनेजुएला तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ने ही उससे ज्यादा तेल सप्लाई किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। पहले भी भारत के बड़े सप्लायर्स में शामिल रहा है वेनेजुएला वेनेजुएला भारत के बड़े तेल सप्लायर्स में शामिल रहा है। 2012 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना था और कई साल तक टॉप-5 में रहा। 2019 तक वेनेजुएला हर साल करीब 1.6 करोड़ टन कच्चा तेल भारत भेज रहा था। उसी दौरान दोनों देशों का व्यापार बढ़कर 6.4 अरब डॉलर पहुंच गया था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल कारोबार का था। हालांकि, अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के तेल खरीदारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत ने करीब एक साल तक वहां से तेल खरीद बंद कर दी थी। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार घटकर 67.9 करोड़ डॉलर रह गया। भारत की रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है वेनेजुएलाई तेल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना आसान नहीं माना जाता। हालांकि, भारत की आधुनिक रिफाइनरियां इस तरह के तेल को डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों में बदल सकती हैं। यह तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता भी पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रिफाइनरियां इसे आर्थिक रूप से फायदे का सौदा मानती हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। उन्होंने बताया कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों का वहां निवेश भी है। भारत सरकार के मुताबिक, भारतीय सरकारी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अच्छी हिस्सेदारी है और वे आगे भी वहां निवेश बढ़ाने के मौके तलाश रही हैं। रोड्रिगेज तेल मंत्री रहते भी भारत आ चुकी हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक डेल्सी रोड्रिगेज छठी बार भारत आई हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में भी भारत आई थीं। तब वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल सप्लाई बढ़ाने, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश पर बातचीत हुई थी। उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से वेनेजुएलाई तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई थी।

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