सिंहस्थ-2028 से पहले बिजली अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए बनाई जा रही 132 केवी सनावद आरटीएस-निमाड़खेड़ी विद्युत पारेषण लाइन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने निर्माण कार्य में बाधा डालने और अधिकारियों-कर्मचारियों से अभद्रता करने के आरोप में 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं दूसरी ओर प्रभावित विधवा किसान के समर्थन में ग्रामीणों और किसान प्रतिनिधियों ने मुआवजे को लेकर सवाल उठाए हैं। निर्माण कार्य रोकने और कर्मचारियों को धमकाने का आरोप
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के अनुसार 132 केवी सनावद आरटीएस-निमाड़खेड़ी विद्युत पारेषण लाइन का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। सिंहस्थ-2028 के पूर्व इस परियोजना को पूरा किया जाना है। कंपनी के मुताबिक प्रस्तावित 63 टावरों में से 61 टावर स्थापित किए जा चुके हैं। कंपनी का आरोप है कि हाल ही में ग्राम सुलगांव स्थित एक कृषि भूमि पर लाइन से संबंधित गेटरी फाउंडेशन निर्माण कार्य शुरू किया गया था। इसी दौरान कुछ लोग मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न की। अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने तथा काम बंद कराने की कोशिश की गई। इस मामले में धनगांव थाना पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221, 132, 127(2) और 189(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार एफआईआर में गोपाल पाटीदार, रामेश्वर गुर्जर, विशाल गुर्जर, कैलाश पाटीदार, जगदीश यादव, उदित नांदिया, सीताराम इंगला, धर्मेंद्र और किशोर पाटीदार को आरोपी बनाया गया है। धनगांव थाना के उप निरीक्षक दिनेश कुमरावत ने एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की है। विधवा किसान ने लगाया बिना अनुमति टावर लगाने का आरोप
दूसरी ओर, जिस जमीन पर निर्माण कार्य चल रहा है, उसकी मालिक विधवा किसान तुलसाबाई ने प्रशासन और कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी करीब तीन एकड़ कृषि भूमि में पहले से दो हाईटेंशन टावर लगे हुए हैं और अब बिना अनुमति छह और टावर लगाए जा रहे हैं। तुलसाबाई का आरोप है कि उन्हें अब तक किसी प्रकार का उचित मुआवजा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि परिवार का भरण-पोषण कृषि भूमि पर ही निर्भर है और टावरों की संख्या बढ़ने से खेती प्रभावित होगी। किसानों ने उठाए मुआवजे और जमीन उपयोग के सवाल
क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से इलाके में भारी पुलिस बल और राजस्व अमले की मौजूदगी देखी जा रही है। उनका आरोप है कि प्रभावित किसानों की आपत्तियों और मुआवजे के मुद्दे का संतोषजनक समाधान किए बिना निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। किसान प्रतिनिधियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तुलसाबाई को उचित मुआवजा नहीं दिया गया तो आगे आंदोलन किया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावित किसान को न्याय दिलाने की मांग की गई है। परियोजना और किसान हितों के बीच संतुलन की चुनौती
यह मामला अब केवल एक विद्युत परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ प्रशासन और पावर ट्रांसमिशन कंपनी सिंहस्थ-2028 से जुड़ी महत्वपूर्ण बिजली परियोजना को समय पर पूरा करने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित किसान भूमि उपयोग, अनुमति और मुआवजे के मुद्दे उठा रहे हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद विवाद और गहरा गया है। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और मुआवजे संबंधी दावों की जांच पर टिकी हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं, ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और गर्मा सकता है।
