सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के मामले में जांच कमेटी को बहुत कम शिकायतें मिली हैं। प्रदर्शनकारियों और पुलिस पर हमले के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसके कारण कमेटी अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकी है। पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड इन्क्वायरी कमेटी (HPEC) ने कोर्ट को बताया कि शिकायतों के लिए पोर्टल और ईमेल आईडी शुरू करने के बावजूद उसे बहुत कम शिकायतें मिलीं। 29 अक्टूबर को हुई बैठक में भी सिर्फ एक शिकायतकर्ता पेश हुआ। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पीड़ितों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमा किए गए वीडियो, याचिकाएं और हलफनामे कमेटी को सौंपने की अनुमति दी। साथ ही कहा कि कमेटी उपलब्ध सामग्री के आधार पर जांच आगे बढ़ाए और शिकायतों का अनिश्चितकाल तक इंतजार न करे। पोर्टल पर शिकायत के लिए नाम और पहचान बताना जरूरी नहीं चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कमेटी की कार्रवाई रिपोर्ट देखी। रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी ने 13 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराने के लिए पोर्टल शुरू किया था। इस पर शिकायतकर्ता को अपना नाम, आधार नंबर या दूसरी पहचान संबंधी जानकारी देना जरूरी नहीं है। कमेटी ने बताया कि उसने शिकायतों के लिए देशभर के 149 अखबारों में सार्वजनिक नोटिस भी पब्लिश कराया था। इसके अलावा ईमेल, डाक और सीधे कमेटी के कार्यालय में शिकायत जमा कराने की सुविधा दी गई थी। 17 अक्टूबर को प्रेस रिलीज भी जारी की गई, लेकिन इसके बावजूद बहुत कम शिकायतें मिलीं। पोर्टल पर कुछ शिकायतें आईं, जबकि ईमेल, डाक या सीधे जमा कराई गई कोई शिकायत नहीं मिली। याचिकाकर्ताओं ने कहा- पहले ही सौंप चुके हैं शिकायतें याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि उन्होंने पोर्टल शुरू होने से पहले ही कमेटी को शिकायत दी थी। पोर्टल शुरू होने के बाद तय प्रक्रिया के तहत एक और शिकायत जमा कराई गई थी। सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जमा किए गए वीडियो और दूसरी सामग्री कमेटी को भेजी जा सकती है। इससे हर पीड़ित को अलग-अलग कमेटी के सामने आने की जरूरत नहीं होगी। ग्रोवर ने यह भी कहा कि कथित हिंसा के मामलों में एक भी FIR दर्ज नहीं हुई है। शंकरनारायणन ने कहा कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी नहीं हुई, जबकि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में ऐसी कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई गई थी। कोर्ट बोला- पीड़ितों को कमेटी के सामने आने के लिए प्रोत्साहित करें CJI ने याचिकाकर्ताओं से पीड़ितों को कमेटी के सामने अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता पीड़ितों को कमेटी के सामने बुलाने का अनुरोध कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि कमेटी का गठन पुलिस अधिकारियों या उनके सीनियरों को कार्रवाई करने से नहीं रोकता। अगर उन्हें लगता है कि मौके पर तैनात किसी पुलिसकर्मी ने गलत काम किया है, तो वे उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। CJI ने कमेटी की एमिकस क्यूरी मोनिका गुसाईं से कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर तथ्य-जांच रिपोर्ट तैयार की जाए। सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने रिपोर्ट सभी पक्षों को देने की मांग की, ताकि वे कोर्ट की मदद कर सकें। वृंदा ग्रोवर ने कहा कि रिपोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से यह जानकारी नहीं दी गई है कि प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी थी। कोर्ट ने कमेटी से रिटायर्ड मेघालय DGP डॉ. एल.आर. बिश्नोई का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया।
