शादी का झांसा देकर रेप के आरोप से घिरे पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के डिप्टी सीटीआई (CTI) द्वारकेश अय्यर को रतलाम कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। फैसला तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर ने सुनाया है। अधिवक्ता अमित पांचाल ने बताया कि 23 फरवरी 2021 को मुंबई की एक महिला द्वारा पश्चिम रेलवे रतलाम मण्डल में कार्यरत डिप्टी सीटीआई द्वारकेश अय्यर पर शादी का झांसा देकर रेप करने और धमकाने का आरोप लगाया था। स्टेशन रोड़ थाना पर शून्य एफआईआर दर्ज कर मामला जीआरपी को सौंपा था। जीआरपी थाना रतलाम के तत्कालीन थाना प्रभारी अजय कुमार मिश्रा ने डिप्टी सीटीआई के खिलाफ शादी का झांसा देकर रेप करने, धमकाने का केस दर्ज किया था। अपराध दर्ज होने के बाद डिप्टी सीटीआई द्वारा उच्च न्यायालय इन्दौर के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका प्रस्तुत की थी। न्यायालय के समक्ष डिप्टी सीटीआई की ओर से उनके अधिवक्ता अमित कुमार पांचाल द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और अभियोजन की ओर से पेश गवाहों से यह स्पष्ट हुआ कि महिला द्वारा पूर्व में ही डिप्टी सीटीआई के खिलाफ वर्ष 2018 में शिकायत की जा चुकी थी। महिला द्वारा एफआईआर में बताई घटना 20 दिसंबर 2020 की थी जबकि उसकी ओर से एफआईआर 23 फरवरी 2021 को दर्ज कराई। पति जीवित तलाक भी नहीं हुआ उक्त महिला विवाहित होकर उसका पति जीवित था। दोनों का कानूनी रुप से तलाक भी नहीं हुआ था। उक्त महिला व्दारा डिप्टी सीटीआई को वाट्सएप चेट्स पर धमकाया गया था। महिला और उसके पति के खिलाफ पूर्व में महाराष्ट्र में अपराध दर्ज था। जिसमें वे दोनों समय-समय पर हाजिर होते रहे थे। जिस दिनांक की घटना महिला द्वारा बताई गई थी उस दिनांक को वह रतलाम में थी ही नहीं। महिला ने डिप्टी सीटीआई के खिलाफ महाराष्ट्र में भी रेप केस दर्ज करवाने का काफी प्रयास किया लेकिन यह अपराध दर्ज नहीं हुआ था। जीआरपी ने स्टेशन रोड थाने पर भेजा महिला व्दारा डिप्टी सीटीआई को गिरफ्तार करवाकर जेल भेजने के कई प्रयास किए गए। यहां तक कि अग्रिम जमानत आदेश होने के बाद भी जीआरपी थाना रतलाम की मदद से उसे अन्य केस में गिरफ्तार किए जाने के लिए महाराष्ट्र पुलिस को रतलाम लाया गया था। डिप्टी सीटीआई के खिलाफ मामले को साबित किए जाने के लिए उक्त महिला समेत अन्य गवाहों तत्कालीन थाना प्रभारी जीआरपी थाना इंदौर गायत्री सोनी, तत्कालीन थाना प्रभारी जीआरपी थाना रतलाम अजय कुमार मिश्रा आदि गवाही दी गई। कोर्ट द्वारा पूरा मामला संदेहास्पद मानकर व अन्य आधारों पर डिप्टी सीटीआई को दोषमुक्त कर दिया।
