छत्तीसगढ़ में रामनवमी के अवसर पर कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। रायपुर में हनुमान चालीसा महापाठ का भव्य आयोजन होगा। जिसका लाइव प्रसारण 100 देशों में किया जाएगा। एक ही समय में कई देश के श्रद्धालु सामूहिक रूप से जुड़ेंगे। रायगढ़ में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। कोरबा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा होगी। अंबिकापुर के प्राचीन राम मंदिर में राजपरिवार के सदस्य पूजा करेंगे। दुर्ग शहर के 250 साल पुराने श्री राम पंचायती मंदिर में 108 परिक्रमा कर भगवान की पूजा की गई। यहां 50 हजार भक्तों के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई है। रायपुर में आयोजन का देशभर में लाइव प्रसारण रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में हनुमान चालीसा महापाठ होगा। यह कार्यक्रम श्री हनुमान महापाठ समिति की ओर से लगातार 18वें वर्ष आयोजित किया जा रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण संस्कार टीवी के माध्यम से देश दुनिया में किया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, रायपुर के साथ ही देशभर के करीब 2000 स्थानों पर एक ही समय में श्रद्धालु सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे, जिससे यह आयोजन वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व प्राप्त करेगा। दुर्ग में 50 हजार भक्तों के लिए भंडारा दुर्ग शहर के ढाई सौ साल पुराने मंदिर में आज 50 हजार भक्तों के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। पांच कंडील के पास श्री राम पंचायती मंदिर में भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। रायगढ़ में निकलेगी भव्य शोभायात्रा रायगढ़ में पिछले 12 साल से रामनवमी पर शोभायात्रा निकाली जा रही है। इस साल 54 समाजों के लोगों की सहभागिता के साथ 60 से अधिक बिरादरी और संस्थाओं के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे। इस दौरान शोभायात्रा मार्ग पर 3 से 4 स्थानों पर एम्बुलेंस की व्यवस्था रहेगी। इमरजेंसी कंडीशन में डॉक्टरों की टीम एक्टिव रहेगी। नगर निगम की टीम शोभायात्रा के पीछे सफाई व्यवस्था संभालेगी। रामलीला मैदान में रामभक्तों के लिए विशाल भंडारा और महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। 650 साल पुराना राम जानकी मठ दुर्ग के चंडी मंदिर के पास मठ पारा में स्थित प्राचीन श्री राम जानकी मंदिर बड़े मठ का इतिहास लगभग 650 वर्ष साल पुराना है। प्राचीन काल में यह महंत और साधु संतों तपो भूमि थी। यहां पर धुनी लगाते और भक्ति में लीन रहते थे। उनकी भक्ति से प्रभावित होकर भोसले राजाओं ने यहां मंदिर स्थापित किया। मंदिर परिसर में ही एक प्राचीन बावली (कुआं) मौजूद है जहां का पानी कभी नहीं सूखता
