भोपाल नगर निगम की मेयर इन कौंसिल (एमआईसी) की मीटिंग में जनप्रतिनिधियों ने प्रॉपर्टी समेत अन्य टैक्स पर अधिकारियों को घेर लिया। कहा कि पहले 7-7 लाख रुपए के नोटिस दिए जाते हैं। बाद में जोन अधिकारी यही टैक्स 1 लाख रुपए तक कर देते हैं। एमआईसी ने सीधे तौर पर अफसरों के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। लिंक रोड नंबर-2 स्थित निगम मुख्यालय पर एमआईसी की मीटिंग हुई। कुछ सदस्यों ने कहा कि कई जोन अधिकारी कार्यालय में बैठते ही नहीं हैं। लोगों के फोन तक नहीं उठाते। लोगों को 7-7 लाख रुपए तक के संपत्तिकर और दूसरे करों के नोटिस थमा दिए जाते हैं। बाद में पैसा लेकर यही राशि 1 लाख कर दी जाती है। उन्होंने जोन कार्यालयों में जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई। 16 में से 15 एजेंडों को मंजूरी
इस विवाद के बीच एमआईसी ने 16 में से 15 एजेंडों को मंजूरी दे दी। माता मंदिर स्थित पुराने निगम ऑफिस, स्मार्ट सिटी गोविंदपुरा, शाहपुरा लेक के पास भवन अनुज्ञा कार्यालय को किराए पर देने की मंजूरी दी। बैठक में आवास, विकास कार्य और लीज से जुड़े प्रस्ताव मंजूर संपत्तियां और लीज रिन्युअल प्रधानमंत्री आवास योजना
