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भाषा अलग, ट्रांसलेटर नहीं है, आने-जाने का खर्च उठा लो…:मोबाइल चोरी केस में बहाने बनाती रही पुलिस;फुटेज देने पर भी ढूंढ़ने में 4 साल लगे

विदिशा के इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी राजेंद्र अहिरवार ने शायद नहीं सोचा होगा कि 20 हजार रुपए का मोबाइल चोरी होने के बाद उसे वापस पाने के लिए उन्हें चार साल तक थानों, अफसरों और आयोगों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। अक्टूबर 2022 में उनकी दुकान से मोबाइल चोरी हो गया था। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद थी। फुटेज भी उसी दिन पुलिस को सौंप दिया गया था। इसके बावजूद न तो तुरंत एफआईआर दर्ज हुई और न ही मोबाइल बरामद हो सका। खरी फाटक के पास रहने वाले राजेंद्र बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें भरोसा था कि सीसीटीवी फुटेज होने के कारण पुलिस जल्द कार्रवाई करेगी, लेकिन समय बीतता गया और मामला आवेदन तक सीमित रहा। कई बार थाने और एसपी कार्यालय जाने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के तहत जानकारी मांगनी शुरू कर दी। दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले में कारोबारी से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… दुकान में आईं तीन बच्चियां, कुछ मिनट में गायब हो गया मोबाइल राजेंद्र बताते हैं- 12 अक्टूबर 2022 को राजेंद्र अपनी दुकान पर ग्राहकों के काम में व्यस्त थे। इसी दौरान तीन बच्चियां दुकान में आईं। कुछ देर बाद जब उन्होंने काउंटर पर रखा मोबाइल देखा तो वह गायब था। सीसीटीवी फुटेज देखने पर पता चला कि बच्चियों में से एक मोबाइल उठाकर ले गई थी। राजेंद्र बताते हैं कि सीसीटीवी फुटेज लेकर सिविल लाइन थाने पहुंचा। पुलिस ने आवेदन तो ले लिया, लेकिन एफआईआर नहीं की। पूछने पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला। समय बीतता गया और मामला आवेदन तक ही सीमित रहा। एसपी ऑफिस में भी कई आवेदन दिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मुझे बार-बार आश्वासन मिलता रहा कि कार्रवाई होगी, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। देखिए वारदात की सीसीटीवी फुटेज लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत जानकारी मांगी राजेंद्र कहते हैं- जब पुलिस से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मध्य प्रदेश लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम-2010 के तहत जानकारी मांगी। उन्होंने सवाल पूछा कि CCTV फुटेज होने के बाद भी अपराध दर्ज क्यों नहीं किया गया? आरोपियों की तलाश क्यों नहीं की गई? मोबाइल ट्रैकिंग की क्या स्थिति है? और कार्रवाई में देरी का कारण क्या है? लेकिन तय समय सीमा में उन्हें जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने 2 जून 2023 को प्रथम अपील दायर कर दी। 18 जुलाई 2023 को जवाब मिला कि तकनीकी जांच में मोबाइल की लोकेशन कर्नाटक में मिली है और मोबाइल सक्रिय है, लेकिन उनके मूल सवालों का जवाब फिर भी नहीं दिया गया। सूचना नहीं देने पर थाना प्रभारी पर जुर्माना जब जवाब नहीं मिला तो राजेंद्र ने सूचना के अधिकार और लोक सेवा गारंटी कानून का सहारा लिया। मामले में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर तत्कालीन थाना प्रभारी पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। साथ ही प्रतिदिन 250 रुपए की पेनल्टी के भी निर्देश दिए गए। राजेंद्र बताते हैं कि टीआई को 2023 से केस क्लोज होने तक यह पेनल्टी देना थी। प्रक्रिया में हुई परेशानी और आवागमन के लिए क्षतिपूर्ति राशि भी मिली, लेकिन उनका कहना है कि इसके बावजूद FIR दर्ज होने में और समय लगा। नौ महीने बाद दर्ज हुई एफआईआर राजेंद्र का आरोप है कि पुलिस ने आवेदन तो ले लिया, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया। लगातार शिकायतों और दबाव के करीब नौ महीने बाद 22 जुलाई 2023 में एफआईआर दर्ज हुई। इस दौरान उन्होंने पुलिस से पूछा कि कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ट्रांसलेटर नहीं है, इसलिए दिक्कत है राजेंद्र का दावा है कि जांच के दौरान उन्हें कई अजीब जवाब सुनने को मिले। एक थाना प्रभारी ने कहा कि मोबाइल कर्नाटक में सक्रिय है। वहां की भाषा अलग होने के कारण कार्रवाई में परेशानी आ रही है, क्योंकि ट्रांसलेटर उपलब्ध नहीं है। राजेंद्र के मुताबिक, एक बार तो उनसे यह तक कहा गया कि यदि मोबाइल जल्दी मंगवाना है तो आने-जाने का खर्चा उठा लो। आयोगों से मंत्रियों तक पहुंची शिकायत मोबाइल की तलाश में राजेंद्र ने हार नहीं मानी। उन्होंने एसपी, आईजी, डीआईजी कार्यालय, मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग, जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों तक शिकायतें भेजीं। हर जगह से कार्रवाई का भरोसा मिला, लेकिन मोबाइल नहीं मिला। खात्मा लगाने की जानकारी मिली, फिर शुरू हुई नई लड़ाई इस साल राजेंद्र को पता चला कि मामले में खात्मा लगा दिया गया है। उन्होंने 30 मार्च 2026 को दोबारा आवेदन देकर खात्मा हटाने और मामले में दोबारा कार्रवाई की मांग की। सवाल उठाया कि जब मोबाइल की लोकेशन उपलब्ध थी तो मामला बंद कैसे किया जा सकता है? नए थाना प्रभारी आए और कुछ दिनों में बरामद हुआ मोबाइल राजेंद्र बताते हैं कि हाल ही में सिविल लाइन थाना प्रभारी के रूप में राजपाल सिंह जादौन की पदस्थापना हुई। उन्होंने पुराने रिकॉर्ड और तकनीकी जानकारी की समीक्षा कर मामले को फिर से खुलवाया। राजेंद्र का दावा है कि जहां कई वर्षों तक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी, वहीं नए थाना प्रभारी के आने के बाद कुछ ही दिनों में मोबाइल कर्नाटक से बरामद कर लिया गया। राजेंद्र का आरोप है कि पुलिस ने मोबाइल तो बरामद कर लिया, लेकिन आरोपी के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। “मैं 10वीं पास हूं, लेकिन अपने अधिकार जानता हूं… करीब 25 साल से इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार कर रहे राजेंद्र कहते हैं- मैं सिर्फ 10वीं पास हूं, लेकिन अपने अधिकार जानता हूं, अगर मैं बीच में हार मान लेता तो शायद मेरा मामला हमेशा के लिए बंद हो जाता। यह लड़ाई सिर्फ मोबाइल की कीमत के लिए नहीं थी। राजेंद्र कहते हैं- चार साल बाद मेरा मोबाइल तो बरामद हो गया, लेकिन यह मामला कई सवाल जरूर छोड़ रहा है- क्या एक आम नागरिक को अपनी शिकायत पर कार्रवाई कराने के लिए इतनी लंबी लड़ाई लड़ना पड़ेगी? अगर CCTV फुटेज होने के बावजूद FIR और कार्रवाई में वर्षों लग जाएं तो व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा? 2023 में मोबाइल चोरी का मामला दर्ज हुआ था मामले में सिविल लाइन थाना प्रभारी राजपाल सिंह जादौन का कहना है कि वर्ष 2023 में मोबाइल चोरी का केस दर्ज किया गया था। साइबर टीम मोबाइल की लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर लगातार ट्रैकिंग करती रही। हाल ही में मोबाइल की लोकेशन कर्नाटक में मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां जाकर मोबाइल बरामद कर लिया। कोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मोबाइल फरियादी को सौंप दिया जाएगा।

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