गर्ल्स हाई स्कूल कर्रापुर में कक्षा 9वीं और 10वीं की 181 छात्राएं पढ़ रही हैं। स्कूल सुबह 10:30 बजे शुरू होता है। छात्राएं जैसे ही स्कूल पहुंचती हैं, उन्हें गेट से ही गंदगी और कुत्तों का सामना करना पड़ता है। कक्षाओं में भी एक-दो कुत्ते या पिल्ले बैठे मिलते हैं, क्योंकि यहां की प्राचार्य ने स्ट्रीट डॉग्स पाल रखे हैं। यहां 4-6 कुत्ते हमेशा मौजूद रहते हैं। इन कुत्तों को रखने के लिए एक कमरा भी खाली छोड़ दिया गया है। छात्राओं के साथ ही यहां के शिक्षकों को हर रोज इन कुत्तों से जूझना पड़ता है। इनके द्वारा की जाने वाली गंदगी और धमाचौकड़ी के बीच ही पढ़ना-पढ़ाना होता है। शिक्षक, छात्राएं और अभिभावक भी इस पर आपत्ति जता चुके हैं, लेकिन प्राचार्य न तो कुत्तों को बाहर कर रही हैं और न ही किसी को ऐसा करने दे रही हैं। इस स्कूल में कुत्ते दो साल से पाले जा रहे हैं। ऐसा तब है, जब सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के आसपास से कुत्तों को हटाने को कहा था। छात्रा को काटा तो कराना पड़ा इलाज स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 9वीं की छात्रा निकिता अहिरवार को स्कूल में कुत्ते ने काट लिया था। उसे इलाज कराना पड़ा। इसके अलावा टिफिन देने के लिए आईं शबनम खान और आकांक्षा अहिरवार पर भी स्कूल में कुत्ते झपट चुके हैं। अभिभावक स्कूल आने से डरते हैं। छात्राएं जब टिफिन खोलती हैं, तो ये कुत्ते आकर उनके आसपास झुंड में खड़े हो जाते हैं और झपटते रहते हैं। अरविंद जैन, जिला शिक्षा अधिकारी कर्रापुर स्कूल के इस मामले में एक बार शिकायत आई थी, तो पता कराया था। तब प्राचार्य ने इसे दबाव बनाने वाला मामला बताया था। यदि ऐसा कुछ है, तो मैं जांच कराऊंगा। रिपोर्ट भी भेज दूंगा। सीधी बात – वंदना अधावे, प्राचार्य कुत्तों को पालने में क्या बुराई : प्राचार्य Q. स्कूल में कुत्ते पाले गए हैं क्या? इसमें क्या बुराई है? आपको किसने बताया? Q. शिक्षक और छात्राएं परेशान हैं, फिर भी नहीं हटाया? क्यों हटाना? जानवरों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। Q. छात्राओं को काटते और झपटते हैं, इसके बाद भी रखे हैं? रात में चौकीदार अकेला रहता है, तो कुत्ते उसके साथ चौकीदारी करते हैं। Q. हाल ही में एक मादा ने बच्चे दिए हैं? उसे रखने के लिए कमरा दे दिया? कुछ दिन रही, फिर वह चली गई।
