मध्य प्रदेश सरकार ने पेट्रोल, डीजल और CNG पंप संचालकों को लंबित टैक्स असेसमेंट के मामलों में राहत दी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के पात्र मामलों में व्यापारियों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर स्व-घोषणा के जरिए कर निर्धारण पूरा माना जाएगा। वाणिज्यिक कर विभाग ने इसके लिए अधिसूचना जारी की है। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश वैट अधिनियम 2002, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956, मोटर स्पिरिट उपकर अधिनियम 2018 और हाई स्पीड डीजल उपकर अधिनियम 2018 के तहत लंबित मामलों पर लागू होगी। निर्धारित फॉर्म में आवेदन करने पर विभाग उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर असेसमेंट पूरा करेगा। किन पंप संचालकों को मिलेगा लाभ यह सुविधा उन्हीं पंजीकृत पेट्रोल पंप संचालकों को मिलेगी, जिन्होंने मध्य प्रदेश में अधिसूचित तेल कंपनियों या पंजीकृत व्यापारियों से टैक्स और उपकर चुकाकर पेट्रोल, डीजल या CNG खरीदा है। साथ ही वर्ष 2024-25 में उनके खिलाफ टैक्स चोरी का मामला नहीं होना चाहिए। इसके अलावा अतिरिक्त कर या ऑडिट से संबंधित लंबित नोटिस का अनुपालन बाकी नहीं होना चाहिए और संबंधित वर्ष के लिए रिफंड का दावा भी नहीं किया गया हो। आवेदन के साथ ये दस्तावेज जरूरी पंप संचालकों को आवेदन के साथ कर और ब्याज जमा करने की चालान कॉपी लगानी होगी। 2 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाले कारोबारियों को CA की ऑडिट रिपोर्ट भी देनी होगी। CST में छूट या रियायती दर का लाभ लिया गया है तो फॉर्म-C, F, E आदि मूल दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। चार प्रकार के फार्म होंगे फॉर्म-ए : वैट के लिए फॉर्म-बी : केंद्रीय बिक्री कर के लिए गलती मिलने पर सुधार का मौका आवेदन की जांच में कोई कमी या गलती मिलने पर अधिकारी लिखित नोटिस जारी कर सुनवाई और सुधार का मौका देंगे। तय समय में कमी दूर करने पर आवेदन स्वीकार किया जा सकेगा। सुधार नहीं करने या सुनवाई में उपस्थित नहीं होने पर आवेदन खारिज किया जा सकता है। 30 दिन में आपत्ति नहीं तो आवेदन मान्य नई व्यवस्था में विभाग के लिए समयसीमा भी तय की गई है। आवेदन जमा होने के बाद 30 दिन के भीतर कोई आपत्ति या सूचना नहीं भेजी जाती है तो आवेदन स्वत: स्वीकार माना जाएगा और असेसमेंट पूरा हो जाएगा। इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। इन मामलों को नहीं मिलेगा लाभ टैक्स चोरी के मामलों में फंसे कारोबारी इस सुविधा के दायरे से बाहर रहेंगे। वर्ष 2024-25 में कर चोरी पकड़े जाने, अतिरिक्त कर की मांग का नोटिस जारी होने और उसका अनुपालन नहीं करने वाले मामलों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह कर ऑडिट के बाद जारी नोटिस का अनुपालन नहीं करने वाले और संबंधित वर्ष में कानून के तहत रिफंड का दावा करने वाले पंप संचालक भी इस व्यवस्था के पात्र नहीं होंगे।
