खरगोन की 40 साल पुरानी जवाहरलाल नेहरू सहकारी सूत मिल की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो गई है। लगभग 25 करोड़ रुपए के घाटे में जाने के बाद मिल वैश्विक मंदी से उबर नहीं पाई। नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसीडीसी) ने ब्याज सहित 24 करोड़ 16 लाख रुपए का बकाया निकलने पर 23 सितंबर को नीलामी तय की है। एनसीडीसी की क्षेत्रीय निदेशक इंद्रजीत कौर ने नीलामी की सूचना जारी कर दी है। यह मिल वर्ष 2023-24 में 25.56 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाने के बाद घाटे में चली गई थी। दिसंबर 2025 में इसे बंद कर दिया गया, जिससे 500 से अधिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए। मिल के अंशधारियों की रकम भी फंस गई है। मिल मजदूर और कर्मचारी लेबर कोर्ट से निर्णय पारित कराकर लगभग एक करोड़ रुपए के बकाया, ग्रेच्युटी और बोनस की मांग कर रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव हैं चेयरमैन
जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूज प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड खरगोन इस सूत मिल का संचालन कर रही है। सोसाइटी के पहले अध्यक्ष सहकारिता नेता स्व सुभाष यादव थे, जिसके बाद उनकी पत्नी दमयंती यादव चेयरपर्सन बनीं। वर्तमान में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री अरुण यादव इसके चेयरमैन हैं। सूत मिल सोसाइटी पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और नाबार्ड का भी बकाया है। 6 मई 2025 को 20 करोड़ 97 लाख 91 हजार 380 रुपए की मांग निकाली गई थी। इसके बाद 25 अगस्त 2025 को एनसीडीसी ने मिल पर कब्जा ले लिया। 16 जुलाई 2026 तक यह मांग बढ़कर ब्याज सहित 24 करोड़ 16 लाख 39 हजार 17 रुपए हो गई है। यह प्रॉपर्टी 19.25 एकड़ में फैली हुई है और इसे दो हिस्सों में नीलाम किया जाएगा। प्रबंध निदेशक दीपक कट्टी ने नीलामी की पुष्टि की है। एनसीडीसी ने सोसाइटी की नीलामी दो भागों में करने की तैयारी की है, जिनका रिजर्व प्राइस क्रमशः 4.25 करोड़ रुपए और 3.83 करोड़ रुपए रखा गया है। इसमें बिल्डिंग, मशीनरी और जमीन शामिल है।
