मध्य प्रदेश के रीवा में पुलिसकर्मियों ने एक वकील को बीच सड़क पर पीटा। वकील के कपड़े फाड़ दिए। कॉलर पकड़कर घसीटते थाने ले गए। वकील दस्तावेज दिखाते दिख रहा है, लेकिन पुलिसकर्मी भीड़ के सामने बदसलूकी करते ले जा रहे हैं। कुछ पुलिसकर्मी गाली-गलौज करते भी सुनाई दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार, आदिवासी की जमीन पर चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान मारपीट की गई है। घटना दो दिन पहले की है, लेकिन इसका वीडियो गुरुवार को सामने आया। वीडियो में तीन पुलिसकर्मी अधिवक्ता नीरज वर्मा को कॉलर पकड़कर सड़क पर दौड़ाते और धक्का-मुक्की करते ले जा रहे हैं। आदिवासी की जमीन बचाने पहुंचे थे वकील अधिवक्ता नीरज वर्मा के मुताबिक, श्यामलाल कोल, बृजलाल कोल, बबलू कोल और अर्जुन कोल के नाम वर्ष 1980 से आदिवासी पट्टे की जमीन है। प्रशासन बिना उचित नोटिस के उस जमीन पर बने मकान को गिराने की कार्रवाई कर रहा था। इसी कार्रवाई को रोकने और जमीन के दस्तावेज दिखाने के लिए वह मौके पर पहुंचे थे। भूमाफिया से मिलीभगत का लगाया आरोप नीरज वर्मा का कहना है कि संबंधित भूमि पर तहसीलदार की ओर से बेदखली की कार्रवाई की गई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने अपील दायर कर रखी है। मामला अभी लंबित है और स्टे आवेदन पर भी सुनवाई नहीं हुई थी। इसके बावजूद प्रशासन और पुलिस ने कथित रूप से भू-माफिया के साथ मिलकर आदिवासी परिवार का मकान गिरा दिया। एसडीएम ने न तो उनकी सुनवाई की और न ही जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराईं। विरोध करने पर हुई कहासुनी, कपड़े फाड़ने का आरोप अधिवक्ता के अनुसार, जब उन्होंने कार्रवाई का विरोध किया तो पुलिसकर्मियों ने गाली-गलौज की। व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। पुलिस ने जबरन पकड़कर उनके कपड़े फाड़ दिए। उनका काला कोट और कोर्ट की यूनिफॉर्म भी फट गई। इसके बाद उन्हें घसीटते हुए थाने ले जाया गया। ‘मेरे साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया’ नीरज वर्मा ने कहा- मैं तो केवल पट्टे की जमीन के कागजात दिखा रहा था, ताकि अनुचित कार्रवाई रोकी जा सके, लेकिन मेरे साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया। मुझे लगा कि मेरी हत्या कर दी जाएगी। पुलिस ने आरोपों को किया खारिज मामले में समान थाना प्रभारी विजय सिंह ने बताया- प्रशासनिक टीम न्यायालय के आदेश के तहत कार्रवाई कर रही थी। अधिवक्ता बार-बार शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे थे। उन्हें कई बार समझाया गया, लेकिन वे नहीं माने। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शासकीय कार्य पूरा कराने के लिए उन्हें मौके से हटाकर थाने ले जाया गया। एसडीएम ने भी आरोपों को बताया निराधार संबंधित एसडीएम ने भी अधिवक्ता के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि राजस्व और पुलिस अमला न्यायालय के आदेश और नियमानुसार कार्रवाई कर रहा था। किसी के साथ अभद्रता या पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया गया। वीडियो के बाद बढ़ा विवाद घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। एक ओर अधिवक्ता नीरज वर्मा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन और पुलिस अपनी कार्रवाई को पूरी तरह कानूनी और नियमानुसार बता रहे हैं।
