पन्ना के मैस्कॉट अस्पताल में नाबालिग के गर्भपात के बाद भ्रूण को दफनाने का मामला सामने आया है। एक निजी स्वीपर की सूचना पर पुलिस ने भ्रूण को बाहर निकलवा कर जांच कराई। स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि अस्पताल गर्भपात करने के लिए अधिकृत नहीं था। नाबालिग से जुड़ा मामला होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस और बाल कल्याण समिति को भी सूचना नहीं दी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर शनिवार को अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया। पुलिस को आशंका है कि अस्पताल में लंबे समय से अवैध गर्भपात किए जा रहे थे। इस पहलू पर भी जांच की जा रही है। 2 हजार रुपए देकर कहा- थैले में ट्यूमर है, इसे दफना दो मामले का खुलासा धाम मोहल्ले के रहने वाले राकेश डुमार की सूचना से हुआ। राकेश साफ-सफाई के साथ अंतिम संस्कार का काम भी करते हैं। उन्होंने बताया कि 22 जुलाई 2026 की सुबह मैस्कॉट अस्पताल के बाहर एक महिला ने उन्हें थैला दिया और उसे दफनाने के लिए 2 हजार रुपए दिए। राकेश के मुताबिक, थैले में क्या है? पूछने पर महिला ने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज के शरीर से निकला ट्यूमर है। वह थैला लेकर किलकिला नदी के पुल के पास पहुंचे। दफनाने से पहले थैला खोला तो उसमें भ्रूण मिला। उन्होंने उसे दफना दिया, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि ऐसा करना गलत था। राकेश ने बताया कि वह चार दिन तक असमंजस में रहे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। भ्रूण की गर्भनाल पर मिला नीला मेडिकल क्लैंप राकेश की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने 26 जुलाई 2026 को किलकिला नदी के पास दफनाए गए भ्रूण को बाहर निकलवाया। पोस्टमॉर्टम के दौरान उसकी गर्भनाल पर नीले रंग का मेडिकल क्लैंप मिला। पुलिस ने जांच के लिए भ्रूण का डीएनए भी सुरक्षित रखवाया। रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच में सामने आया मामला कोतवाली टीआई रोहित मिश्रा ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने मैस्कॉट अस्पताल का रिकॉर्ड जब्त किया और सीसीटीवी फुटेज भी निकलवाए। इसके बाद सीएमएचओ से अस्पताल में हुए गर्भपात के संबंध में जानकारी मांगी गई। स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि 19 जुलाई 2026 की रात अस्पताल में 18 साल से कम उम्र की किशोरी का गर्भपात किया गया था। जांच समिति के मुताबिक, अस्पताल इसके लिए अधिकृत नहीं था। नाबालिग से जुड़ा मामला होने के बावजूद इसकी सूचना पुलिस और बाल कल्याण समिति को नहीं दी गई। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि भ्रूण को दफनाने की जिम्मेदारी किसने दी थी और क्या अस्पताल में पहले भी इस तरह के मामले हुए हैं।
