गुना जिले के आरोन इलाके में युवती को सुसाइड के लिए उकसाने के आरोपी पिता पुत्र को कोर्ट ने बरी कर दिया है। युवती ने फांसी लगाकर सुसाइड कर ली थी। सुसाइड नोट में उसने प्रेमी और उसके पिता पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की बात लिखी थी। फैसला सुनते हुए कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या कमजोर मस्तिष्क की कार्रवाई है। हालांकि, युवक फिलहाल गुना में व्यापारी के मुनीम से हुई 17 लाख की लूट के मामले में जेल में बंद है। बता दें कि मामला वर्ष 2022 का है। आरोन की रहने वाली एक 19 वर्षीय युवती राधा मीना ने 6 जून को रात सुसाइड कर लिया था। उसने अपने घर में ही दुपट्टे से फंदा बनाया और उस पर झूल गई थी। सुबह जब वह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं निकली, तो परिवार वाले गेट तोड़कर अंदर घुसे। वहां राधा फंदे पर लटकी हुई थी। सुसाइड नोट में प्रेमी और उसके पिता पर लगाए थे आरोप सूचना मिलने पर आरोन पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम की लिए अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। युवती के पास से दो पेज का सुसाइड नोट भी मिला। सुसाइड नोट में लिखा था- मैंने आप सब का भरोसा तोड़ा, राघव पे किया और उसने मेरा ही तोड़ दिया। जिंदगी में किसी ने बेइज्जती नहीं की और राघव के पापा ने आज मेरी वैल्यू बता दी, कि तूने राघव को बिगाड़ दिया उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी, और अब हमदर्दी दिखा रही है। ज्यादा फिक्र है तो आजा 20 लाख लेकर, करवा इलाज। प्यार करती है तो पैसे दे। मेरे लड़के की जिंदगी बर्बाद कर दी। दूर हो जा या तू इस दनिया में रहेगी, या मैं। चाहे मैं जेल चला जाउं फांसी लग जाये। अब मेरे में इतनी हिम्मत नहीं आज मैं किसी से नजर भी मिला पाउं। राघव के लिये सब कुछ छोड़ा, सबका भरोसा तोडा। आज उसने मुझे ये दिन दिखा दिया। प्यार किया तो अकेले दिल से, उमीद ना देता। तो मेरे साथ क्य टाइम पास किया 5 ईयर से। आज कह रहा मैं इसके लायक नहीं, लेवल की नहीं हूं। मैं कैसे रहूं, अब मेरी लाइफ खत्म हो गई। किस मुंह से घर वालों के सामने जाऊं। सबके समझने पर नहीं समझी इतना भरोसा किया तो ये नहीं पता तो ये मेरा दिल दुखायेगा। मेको माफ कर देना। मैं नहीं जी सकती। उसने मेरी लाइफ के साथ टाइम पास किया है, एक खिलौने की तरह समझा जब तक पास थी मतलब तब अच्छी लगती थी। मन भर गया, फेंक दिया।” सुसाइड नोट और राधा के परिवार वालों के बयानों के आधार पर पुलिस ने राघव शर्मा और उसके पिता महेंद्र शर्मा के खिलाफ सुसाइड के लिए उकसाने की धाराओं में मामला दर्ज किया। विवेचना के बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया।
कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर किया बरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। फैसला सुनते हुए कोर्ट ने कहा कि घटना के पूर्व आरोपी राघव का एक्सीडेंट हो गया था तथा वह घटना के समय भोपाल ईलाजरत था। उसके पिता उसके साथ अटेंडर के रूप में रह रहे थे। तब तर्क के लिए यदि यह भी मान लिया जाये कि आरोपी राघव के अस्पताल में ईलाजरत रहने के दौरान उसके पिता महेन्द्र द्वारा मृतिका से यह कहा भी गया कि उसने राघव को बिगाड़ दिया है., उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी है, यदि उसे ज्यादा फिक्र है और प्यार करती है तो 20 लाख लाकर इलाज करवा दे तथा दूर हो जा या तू इस दुनिया में रहेगी या मैं। तब भी परिस्थितियां यह इंगित नहीं करती हैं कि आरोपी महेन्द्र ने मृतिका को आत्महत्या करने के लिए दुष्ष्रेरित करने के आशय से उक्त बातें कही थी। संभवतः आरोपी राघव से अलगाव से उत्पन्न तनाव या अवसाद से मृतिका ने जीवन समाप्त करने का कदम उठाया, परन्तु यह उसके लिये उपलब्ध रास्ता नहीं हो सकता। कमजोर मस्तिष्क की कार्यवाही आत्महत्या है। उपरोक्त परिस्थिति का सामना मृतिका कर सकती थी एवं पुलिस के पास जास कती थी। जब उसने आत्महत्या की तब वह अपने घर पर ही थी। 17 लाख की लूट के मामले में जेल में है राघव आरोपी राघव शर्मा को इस केस में बरी कर दिया गया है, लेकिन वह फिलहाल जेल में है। वह व्यापारी के मुनीम से हुई लूट के मामले में आरोपी है। राजस्थान के बीकानेर निवासी वासुदेव शर्मा शहर में किराए से रहते हैं और कुंभराज के एक धनिया व्यापारी के यहां कर्मचारी हैं। 7 जुलाई को वे पचोर से नकदी का कलेक्शन कर घर लौटे थे। 8 जुलाई की सुबह करीब 10:30 बजे वे 15 से 17 लाख रुपए से भरा बैग लेकर कुंभराज जाने के लिए निकले। जैसे ही वे पायगा मोहल्ले में शीतला माता मंदिर के पास पहुंचे, बाइक सवार तीन बदमाशों ने उनकी आंखों में मिर्च पाउडर फेंका और नकदी से भरा बैग लेकर फरार हो गए। पुलिस ने इस मामले में राघव शर्मा पुत्र महेंद्र शर्मा सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तभी से वह जेल में है।
