खजुराहो के बागेश्वर धाम पीठाधीस धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 21 दिन की एकांत साधना से बाहर आ गए है। साधना से लौटने के तुरंत बाद, उन्होंने सरकार और व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए, लेकिन अगले ही दिन उनके सुर बदल गए और वे सरकार की प्रशंसा करते नजर आए। नीट पेपर लीक पर सरकार, एजेसियों पर उठाए थे सवाल साधना से लौटने के बाद, शास्त्री ने खुद को ‘विपक्ष’ की भूमिका में प्रस्तुत करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की और व्यवस्था पर सटीक कटाक्ष किए, जिससे कई बच्चों को रोते हुए देखा गया था। हालांकि, अगले ही दिन उनके सुर अचानक बदल गए। उन्होंने सरकार के नीट पेपर लीक को रोकने के निर्णय की सराहना की। शास्त्री ने बताया कि सरकार ने आगामी नीट परीक्षाओं को सेना के माध्यम से कराने और प्रश्नपत्रों को सेना के विमानों से लाने का फैसला किया है, ताकि लीक को रोका जा सके। लोगों से कहा-जो मुंह में आ गया, सो कह देते हैं धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में कहा, “हमने अपनी बात कथा में ऐसी कही थी, हम तो साधु हैं, साधु तो बोल ही देता है। हम कोई प्लानिंग से नहीं बोलते। जो मुंह में आ गया, सो कह देते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि साधु हमेशा सच बोलता है और वे न किसी के खिलाफ हैं, न किसी के पक्ष में, बल्कि सनातन और देश के पक्ष में हैं। सरकार के फैसले की सराहना की उन्होंने भारत सरकार को इस मामले पर गौर करने के लिए धन्यवाद दिया। शास्त्री ने दोहराया कि उनके जीवन में कभी राजनीतिक भाव नहीं आया और उनका उद्देश्य राजनीति करना नहीं है, बल्कि एक साधु के रूप में सामाजिक मुद्दों पर बोलना है, खासकर जब बच्चे रोते हुए अपनी समस्या लेकर आते हैं। कथा के दौरान कहा था-काश नेताओं की वोटें लीक हो जाएं बद्रीनाश धाम में शुक्रवार को नीट पेपर लीक पर प्रतिक्रिया देते हुए पंडित शास्त्री ने कहा था, “चुनाव तो लीक नहीं होते… काश नेताओं की वोटें लीक हो जाएं! किसान और मजदूर का बेटा पेट काट-काटकर फीस भरता है और जब पेपर लीक होता है, तो पूरे परिवार पर बिजली गिरती है। गलती विद्यार्थियों की नहीं, सिस्टम की है। तो सिस्टम को यह दंड होना चाहिए कि अगली बार की फीस माफ हो। भुगतें क्यों विद्यार्थी? सिस्टम भुगते!”
इससे पहले गुरुवार को बाबा ने बेरोजगारी और नेताओं के वीआईपी कल्चर पर सरकार को जमकर घेरा था। उन्होंने कहा, “काश हमारे भारत का रुपया इतना मजबूत हो कि ट्रंप चच्चा 30 डॉलर दें, तब हम 1 रुपया दें। साधना से निकला तो पता चला बेरोजगारी बढ़ रही है और युवाओं की चिंता होनी चाहिए। आम जनता से तो कहा गया कि डीजल-पेट्रोल कम जलाएं। काश! नेताओं के चार्टर्ड प्लेन यानी चीलगाड़ी पर भी रोक लगाई जाती। 3 महीने के लिए नेताओं की सैलरी कट करनी चाहिए। अब क्या सब आम जनता ही करे?
