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नौरादेही में साथ रहेंगे बाघ, तेंदुआ और चीते:भोपाल के वन विहार जितना बन रहा विशाल बाड़ा, अगस्त से सितंबर के बीच शिफ्टिंग

कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य (नौरादेही) में चीतों की बसाहट की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जुलाई तक बाड़ों का निर्माण पूरा कर अगस्त-सितंबर के बीच चीतों को यहां शिफ्ट करने की तैयारी है। अभयारण्य की मुहली रेंज में आधुनिक बोमा (बाड़े) तैयार किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इन बाड़ों का कुल क्षेत्रफल लगभग 439 एकड़ होगा, जो भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (451 एकड़) के लगभग बराबर है। यहां कुल 5 बाड़े बनाए जा रहे हैं। इनमें सुरक्षा की दृष्टि से 14 फीट ऊंचे सॉफ्ट रिलीज बाड़े और 10 फीट ऊंचे क्वारंटीन बाड़े होंगे। बाड़ों के ऊपरी हिस्से में 6 लेयर के इलेक्ट्रिक पल्स तार लगाए जाएंगे, जो शिकारी जानवरों को दूर रखेंगे। बीचो-बीच बने क्वारंटाइन बाड़े से चीतों के स्वास्थ्य और गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाएगी। कूनो का ‘गौरव’ बनेगा नया मेहमान इस बार चीतों को अफ्रीका या नामीबिया से नहीं, बल्कि कूनो नेशनल पार्क से ही लाया जाएगा। जानकारी के अनुसार, कूनो के प्रसिद्ध चीते गौरव के साथ ही दो नर और दो मादा चीतों को यहां शिफ्ट किया जा सकता है। कूनो अब मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट के लिए एक लॉन्चिंग पैड बन चुका है, जहां चीतों की संख्या अब 57 से अधिक हो गई है। मुहली रेंज में बन रहे आधुनिक बोमा क्यों खास है दुर्गावती टाइगर रिजर्व? वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह देश का ऐसा अनूठा रिजर्व होगा जहां बाघ, तेंदुआ और चीता एक साथ सह-अस्तित्व में रहेंगे। शिकार की उपलब्धता: यहां के मुहली, सिंहपुर और झापन रेंज में 600 वर्ग किमी के खुले मैदान हैं, जहां चिंकारा, चीतल और सांभर की बहुतायत है। टकराव की कम संभावना: विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों शिकारी प्रजातियों के शिकार का तरीका अलग होने के कारण इनके बीच संघर्ष की स्थिति बहुत कम बनती है। चीता चौपाल से ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक चीतों की सुरक्षा और स्थानीय लोगों के साथ तालमेल बिठाने के लिए वन विभाग 20 मई से चीता चौपाल शुरू करने जा रहा है। इसके तहत अभयारण्य के आसपास के गांवों में लोगों को चीतों के व्यवहार और सुरक्षा उपायों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही करीब 100 वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए कूनो भेजा जा रहा है। एक नजर में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व इसलिए बनाए जाते हैं बोमा (बाड़े) वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह के मुताबिक- 25 मार्च को मुख्यमंत्री बोमा निर्माण का भूमि पूजन कर चुके हैं। काम तेजी से जारी है। जुलाई तक निर्माण पूरा होते ही चीतों की शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। ………………… ये खबरें भी पढ़ें 1. कूनो में 4 चीता शावकों की मौत, शव खाए मिले: श्योपुर में शिकार की आशंका श्योपुर कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता KGP12 के चार शावकों की मौत हो गई। मंगलवार सुबह मॉनिटरिंग टीम को डेन साइट (मांद) के पास चारों शावकों के शव मिले। वन विभाग के मुताबिक शव आंशिक रूप से खाए हुए थे, जिससे किसी जंगली जानवर के शिकार की आशंका जताई जा रही है। पढ़ें पूरी खबर 2. मदर्स-डे पर कूनो की चीता माताओं पर बनी शॉर्ट फिल्म: भारत में चीतों का कुनबा अब बढ़कर 57 मदर्स-डे के मौके पर रविवार को कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन ने चीता माताओं के संघर्ष और मातृत्व को समर्पित एक शॉर्ट फिल्म जारी की, जो भारतीय जंगलों में चीतों की नई पीढ़ी को बसाने में उनकी भूमिका को दर्शाती है। पढ़ें पूरी खबर 3. कूनो में खुले जंगल में छोड़े गए दो चीते:CM डॉ. मोहन यादव ने किया रिलीज सीएम मोहन यादव ने सोमवार को कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के तहत दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ा। ये चीते अफ्रीकी देश बोत्सवाना से लाए गए थे। सीएम यादव रविवार शाम कूनो पहुंचे थे और उन्होंने वहीं रात्रि विश्राम किया। आज सोमवार सुबह उन्होंने कूनो रेस्ट हाउस के पास कूनो नदी किनारे स्थित साइट पर इन चीतों को जंगल में रिलीज किया। पढ़ें पूरी खबर

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