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नीट परीक्षा सेंटर के बाहर रोते-बिलखते सड़क पर लेटा पिता:विदिशा में 2 मिनट की देरी से छूटा बेटी का एग्जाम, रोते हुए बोला- कर्ज लेकर पढ़ाया

विदिशा में रविवार को नीट परीक्षा के दौरान एक छात्रा 2 मिनट की देरी से पहुंची। जिस कारण उसे सेंटर में एंट्री नहीं दी गई। पिता 70 किलोमीटर दूर से बेटी को लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। सेंटर के गेट बंद होते ही पिता ने काफी मिन्नतें की। इसके बाद उनकी आंखों में आंसू आ गए और वह सड़क पर रोते हुए लेट गए। केंद्र के बाहर हुई भावुक घटना का वीडियो सोमवार को कांग्रेस ने ट्वीट कर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। दैनिक भास्कर ने पिता और छात्रा से यह जानने की कोशिश की कि आखिर वह लेट कैसे हुए और सेंटर के बाहर क्या हुआ। तीन तस्वीरों में देखें पूरा घटनाक्रम बेटी का सपना टूटता देख पिता भावुक हुए भावुक दृश्य शहर के गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र से सामने आया। जानकारी के अनुसार कुरवाई तहसील के ग्राम कुल्हान निवासी 18 वर्षीय रागिनी विश्वकर्मा अपने पिता उमेश विश्वकर्मा के साथ करीब 70 किलोमीटर दूर से परीक्षा देने पहुंची थीं, लेकिन कुछ मिनट की देरी ने उन्हें परीक्षा से वंचित कर दिया। उमेश विश्वकर्मा ने बताया कि वह रोजाना मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। वे लगभग 300 रुपये प्रतिदिन कमाते हैं। परिवार में चार बच्चे हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई जारी रखी। रागिनी की पढ़ाई के किश्तों पर खरीदी स्कूटी
रागिनी ने आठवीं तक गांव में पढ़ाई की, इसके बाद सात किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ा। परिवार ने किस्तों पर स्कूटी खरीदी और हर महीने करीब तीन हजार रुपये की किस्त चुकाई जा रही है। दो बार समूह से ऋण लेकर लगभग 70 हजार रुपये जुटाए गए। 12वीं में अच्छे अंक पर मिले 25 हजार रुपये और 5 हजार रुपये जोड़कर लैपटॉप खरीदा गया, जिससे उसने ऑनलाइन पढ़ाई कर नीट की तैयारी की। बारिश और पंचर की वजह से हुए लेट
रागिनी रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी। वह पिछली परीक्षा में करीब 400 अंक आने की उम्मीद जता रही थी। उसने 10वीं में 85 प्रतिशत और 12वीं में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। पिता के अनुसार परीक्षा वाले दिन वे सुबह 10:30 बजे घर से निकले थे। रास्ते में बारिश और फिर बाइक पंचर होने से देरी हो गई। परिवार का कहना है कि वे लगभग दो मिनट की देरी से पहुंचे थे। केंद्र के बाहर रागिनी रोने लगी और पिता भी भावुक हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिता ने गेट पर सिर मारा और वहीं गिर पड़े। बाद में केंद्र प्रभारी के प्रयास से उन्हें अंदर भेजा गया, लेकिन बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और परीक्षा से वंचित रह गई। रागिनी कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती है। उसका कहना है कि वह हार्ट अटैक से होने वाली मौतों को रोकने के लिए डॉक्टर बनना चाहती है। जिले में चार केंद्रों पर आयोजित हुई परीक्षा
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) रविवार को जिले के चार परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच आयोजित की गई। परीक्षा सुबह 11 बजे से शुरू होकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चली। केंद्रों पर तीन स्तर की जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेज परीक्षण के बाद विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया। प्रशासन और पुलिस के करीब 280 अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहे, जबकि सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ जवान भी मौजूद रहे। कुल 1709 अभ्यर्थियों के लिए आयोजित इस परीक्षा में अधिकांश छात्र समय पर पहुंचे, लेकिन कुछ छात्र-छात्राएं देर से पहुंचने, दस्तावेजों में त्रुटि और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने के कारण परीक्षा नहीं दे सके। कई अभ्यर्थियों और परिजनों ने अधिकारियों से प्रवेश की गुहार लगाई, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया के चलते अनुमति नहीं मिल सकी। कुछ छात्राओं की आंखों में आंसू थे तो कई अभिभावक निराश लौटे। अधिकारी बोले- बायोमेट्रिक एजेंसी का टाइम तय था
नोडल अधिकारी दीपाश्री गुप्ता ने बताया कि नियमानुसार रिपोर्टिंग टाइम दोपहर 1:30 बजे तक था। कुछ मामलों में देर से पहुंचे विद्यार्थियों को केंद्र तक पहुंचाया गया, लेकिन बायोमेट्रिक एजेंसी का समय 1:40 बजे तक ही था। भोपाल स्तर पर भी चर्चा हुई, लेकिन प्रक्रिया पूरी कराना संभव नहीं हो सका।

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