मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले के डोमकिरकोह गांव में शुक्रवार को एक बीमार बच्चे की उसकी मां की गोद में ही मौत हो गई। खराब सड़क के कारण कोई भी गाड़ी गांव में आने को तैयार नहीं थी। परिवार ने रातभर बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी का इंतजाम करने की कोशिश की। इंतजाम न होने पर माता-पिता अगले दिन पैदल निकल पड़े। परिवार करीब तीन घंटे तक पैदल चलकर 10km दूर मावडेट गांव के लिए निकला, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही बीमार बच्चे की मौत हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। जिसमें परिवार बच्चे को ले जाता दिख रहा है। बदहाल सड़क की 2 तस्वीरें… 25 करोड़ की लागत से बननी थी सड़क इस घटना ने इलाके में सड़क संपर्क को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर तब, जब मेनॉप, माविओंग, रामब्राई और डोमकिरकोह को जोड़ने के लिए ₹25 करोड़ की सड़क परियोजना घोषित की गई थी। उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसॉन्ग ने पहले 10 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना की आधारशिला रखी थी। इसका मकसद इलाके की कनेक्टिविटी सुधारना था। इस परियोजना से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं, बाजारों और अन्य जरूरी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क अब भी खराब हालत में है। डिप्टी कमिश्नर ने घटना की रिपोर्ट मांगी ग्रामीणों के मुताबिक इमरजेंसी और रोजमर्रा के सफर के लिए लोग अब भी पगडंडियों पर निर्भर हैं। घटना ने ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के अमल और दूरदराज के इलाकों तक बुनियादी सेवाएं पहुंचाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। गांव के मुखिया बी सिएम ने घटना की पुष्टि की। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होने देने की अपील की। डिप्टी कमिश्नर ने मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। ——————— ये खबरें भी पढ़ें… युवाओं ने पांच घंटे पैदल चलकर गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल: पिथौरागढ़ के कनार गांव में डोली ही एंबुलेंस सड़क न होने से पिथौरागढ़ जिले के कनार गांव में एक गर्भवती को डोली से 16 किलोमीटर दूर बरम पहुंचाया। खराब मौसम में उबड़-खाबड़ रास्ते से यह दूरी तय करने में युवाओं को पांच घंटे से ज्यादा का समय लग गया। पढ़ें पूरी खबर…
