रीवा में बाढ़ के बीच ड्रम बांधकर शव को गांव तक पहुंचाया गया। घटना जवा जनपद के रौली गांव की है। रविवार को गांव के मोतीलाल तिवारी का संजय गांधी अस्पताल रीवा में निधन हो गया था। इसके बाद शव को गांव लाया जा रहा था, लेकिन बाढ़ के पानी से घर तक पहुंचने का रास्ता बंद था। परिजन और ग्रामीणों को शव घर तक पहुंचाने के लिए ड्रम का सहारा लेना पड़ा। घटना का वीडियो सामने आया है। गांव तराई अंचल में आता है, जहां तमस, बेलन और महाना नदियां निर्धारित जल स्तर से ऊपर बह रही हैं। इसी कारण गांव का रास्ता बंद है। 3 तस्वीरें देखिए… ड्रमों को बांधकर नाव की तरह इस्तेमाल किया ग्रामीणों ने दो ड्रमों को बांधकर उनके ऊपर शव रखा और तेज बहाव के बीच पार कराया। इसके बाद शव को घर ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। वीडियो सामने आने के बाद बाढ़ के दौरान गांवों में व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। सरपंच-सचिव बोले- यह हमारा काम नहीं है ग्रामीणों का आरोप है कि शव को घर तक पहुंचाने के लिए पंचायत से मदद मांगी गई थी। महिला सरपंच और उनके देवर और रोजगार सहायक विवेक तिवारी से संपर्क किया गया। उन्होंने, “यह हमारा काम नहीं है।” कहते हुए मदद से इनकार कर दिया। रोजमर्रा के काम के लिए भी होते हैं परेशान ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण गांव के रास्ते बंद हैं। लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी परेशानी हो रही है। एक परिवार को अंतिम यात्रा के लिए भी सरकारी व्यवस्था नहीं मिल सकी। मजबूरी में ड्रम को नाव की तरह इस्तेमाल कर शव को पानी के पार पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में आपात स्थिति के लिए तत्काल आवागमन की व्यवस्था की जाए। शव को घर या अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाने जैसी परिस्थितियों में ग्रामीणों को सहायता दी जाए। पंचायत की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है। वहीं, इस मामले में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि अगर ऐसी कोई लापरवाही हुई है तो हम जांच के बाद कड़ी कार्रवाई करेंगे।
