मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज ऐसा मामला, जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। तीन महिलाओं से सामूहिक दुष्कर्म का मामला दिल्ली तक पहुंच गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे, अफसरों पर कार्रवाई हुई और गांव में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। लेकिन इस पूरी घटना के पीछे आखिर ऐसी क्या वजह थी, जिसने एक गांव के लोगों को आधी रात एक घर पर हमला करने के लिए एकजुट कर दिया? सिलसिलेवार पढ़िए पूरी कहानी… 8 जुलाई 2004…सिवनी का एक गांव। बारिश का मौसम था। शाम ढल चुकी थी और धीरे-धीरे अंधेरा गहराने लगा था। गांव के ज्यादातर घरों के दरवाजे बंद हो चुके थे। गांव के एक कोने में बने रितेश के घर में उस रात तीन महिलाएं थीं- रमाबाई, उसकी सास जोधा और सविता (तीनों परिवर्तित नाम )। परिवार के पुरुष सदस्य बाहर गए हुए थे। पहले आवाजें आईं, फिर भीड़ दिखाई दी रात बढ़ी तो घर के बाहर लोगों के चलने की आवाज आने लगी। शुरुआत में लगा कि गांव के कुछ लोग गुजर रहे होंगे। लेकिन आवाजें लगातार बढ़ती गईं। कुछ ही देर में घर के बाहर करीब 40-50 लोगों की भीड़ जमा थी। कई लोगों के हाथों में डंडे और टॉर्च थीं। भीड़ में से आवाजें आ रही थीं-‘छोड़ना नहीं है… बाहर निकालो।’ फिर कुछ लोगों ने दरवाजा पीटना शुरू कर दिया। घर से खींचकर सड़क पर ले गए भीड़ घर के अंदर घुसी और तीनों महिलाओं को बाहर खींच लिया। उनके साथ मारपीट की गई। बाल पकड़कर उन्हें घर से बाहर घसीटा गया। इसके बाद भीड़ उन्हें गांव की गलियों से पंचायत भवन की तरफ ले जाने लगी। रास्ते में कई घर थे। महिलाएं मदद के लिए चिल्लाती रहीं, लेकिन किसी घर का दरवाजा नहीं खुला। पंचायत भवन के पास एक घंटे तक करते रहे दुष्कर्म पंचायत भवन के पास पहुंचने के बाद भीड़ रुक गई। इसके बाद तीनों महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। यह सिलसिला करीब एक घंटे तक चला। फिर धीरे-धीरे भीड़ वहां से चली गई। सभी आरोपी भी फरार हो गए। पीछे रह गईं तीनों महिलाएं-घायल और बदहवास। अगले दिन थाने पहुंची शिकायत अगले दिन मामले की सूचना कान्हीवाड़ा थाने पहुंची। पुलिस ने जांच शुरू की। शिकायत के आधार पर सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, घर में घुसने और अन्य संबंधित धाराओं के साथ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने मामले में हस्तक्षेप किया। एक महिला विधायक के नेतृत्व में स्वतंत्र जांच के लिए प्रतिनिधिमंडल बनाया गया। सिवनी पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठे। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारी और एक हेड कांस्टेबल को निलंबित कर दिया। पीड़ित महिला ने पुलिस को बताई आपबीती रमाबाई (परिवर्तित नाम) ने पुलिस को बताया कि भीड़ जबरन घर में घुसी थी। दरवाजा तोड़कर उसे बाल पकड़कर बाहर खींचा गया।
उसने बताया कि वह लगातार मदद के लिए चिल्लाती रही, लेकिन कोई उसकी मदद के लिए बाहर नहीं आया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी था… उस रात आखिर क्या हुआ था?
इतनी बड़ी भीड़ आखिर इन तीन महिलाओं के घर पहुंची ही क्यों थी?
तीनों महिलाओं को ही निशाना क्यों बनाया गया?
क्या इस भीड़ के पीछे कोई पुराना विवाद था?
गांव का कोई व्यक्ति मदद के लिए बाहर क्यों नहीं आया? मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट 2 में कल पढ़िए इन सवालों के जवाब… ये भी पढ़ें… 1. लापता लड़की की खाई में मिली लाश:पुलिस ने कहा- दुष्कर्म के बाद हत्या मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज बात भोपाल के उस चर्चित केस की, जिसने पुलिस की जांच से लेकर CBI की पड़ताल तक कई सवाल खड़े कर दिए थे। भोपाल के बड़े टूरिस्ट प्लेस में दिनदहाड़े 13 साल की बच्ची नित्या लापता हो गई। पढ़ें पूरी खबर… 2. 13 साल की लड़की से रेप…शव 100-फीट की खाई में क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा, 30 अप्रैल 2019 को भोपाल की मनुआभान टेकरी घूमने गई 13 साल की नित्या अचानक लापता हो गई थी। रातभर तलाश के बाद उसका शव करीब 100 फीट गहरी खाई में मिला। पढ़ें पूरी खबर…
