धर्मनगरी चित्रकूट में 27 मार्च को रामनवमी के अवसर पर मनाए जाने वाले ‘चित्रकूट गौरव दिवस’ को लेकर पूरे शहर में भव्य तैयारियां की गई थीं, लेकिन शाम होते ही मौसम ने करवट ले ली और तेज बारिश ने आयोजनों की रफ्तार पर असर डाल दिया। प्रशासन और श्रद्धालुओं की जोश-उत्साह से भरी तैयारियों को बारिश ने कुछ देर के लिए बाधित जरूर किया, लेकिन बाद में कार्यक्रम ने आध्यात्मिक भव्यता के साथ नई चमक हासिल की। नगर के घाटों, सड़कों और मंदिरों को पहले ही भव्य रूप से सजाया गया था। मां मंदाकिनी के तटों पर 21 लाख से अधिक दीपों से प्रकाश फैलाने की योजना थी। पवित्र भरत घाट पर भव्य गंगा आरती और श्रीराम प्राकट्य पर्व के आयोजन की रूपरेखा तैयार थी। घाटों की सीढ़ियों पर दीये सजाकर उनमें तेल तक डाल दिया गया था, जबकि पूरे नगर को बिजली की रोशनी और फूलों से सजाया गया था विश्वविद्यालय की दीपमालाओं से जगमगाया क्षेत्र रामनवमी के पावन अवसर पर ‘चित्रकूट गौरव दिवस’ का मुख्य आकर्षण महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय रहा, जिसने कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे के नेतृत्व में एक लाख एक हजार दीप प्रज्वलित कर पूरे क्षेत्र को आलोकित कर दिया। विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों ने स्फटिक शिला से लेकर सतना बाईपास तक निर्धारित क्षेत्रों में दीपमालाएं सजाईं। कुलगुरु प्रो. चौबे ने इस आयोजन को सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बताते हुए विद्यार्थियों और शिक्षकों का उत्साहवर्धन किया। भरत घाट पर उमड़ा आस्था का सैलाब उत्सव की दूसरी बड़ी झलक मां मंदाकिनी के भरत घाट पर देखने को मिली, जहां राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने विधि-विधान से मां मंदाकिनी का पूजन कर भव्य आरती का शुभारंभ किया। आरती के दौरान घाट पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। दीपों की जगमगाहट, मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच पूरा चित्रकूट आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक समरसता के अद्भुत संगम में डूबा नजर आया।
