जबलपुर में नालों के बीच से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन और दूषित पानी की शिकायतों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। 8 जुलाई को दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने जिला प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के साथ संयुक्त स्थल निरीक्षण कर दो सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान गुरुवार को एनजीटी ने कहा कि पहले दिए गए आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई। प्रशासन की निष्क्रियता के बाद गठित नोडल एजेंसी ने 16 जुलाई को एनजीटी को बताया कि जिला प्रशासन और नगर निगम के असहयोग के कारण स्थल निरीक्षण नहीं हो सका। नोडल एजेंसी अप्रैल में एनजीटी ने गठित की थी। जिसमें कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, नगर निगम कमिश्रनर राम प्रकाश अहिरवार, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड रीजिनल ऑफिसर केपी सोनी सदस्य हैं। 47% पानी पीने योग्य नहीं याचिकाकर्ता ने कहा कि जबलपुर शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइन नालियों के बीच से गुजर रही है, जबकि 47 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है। इसके बाद एनजीटी ने अधिकारियों की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। प्रशासन ने नहीं दी रिपोर्ट नागरिक उपभोक्ता मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से मार्च 2026 में दायर याचिका पर अप्रैल 2026 में एनजीटी ने नगर निगम और जिला प्रशासन से एक महीने में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। असहयोग को बताया ‘गंभीर’ 10 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को बताया कि नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग नहीं करने के कारण संयुक्त निरीक्षण नहीं हो पाया। विभागों के बीच समन्वय की कमी भी सामने आई। एनजीटी के न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार ने इसे गंभीर और आपत्तिजनक बताते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण कर दो सप्ताह के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। कलेक्टर और निगम आयुक्त को पत्र लिखने के निर्देश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने एनजीटी रजिस्ट्रार को निर्देश दिए कि जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को तत्काल पत्र भेजकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ स्थल निरीक्षण में सहयोग सुनिश्चित कराया जाए। 40-50 साल पुरानी पाइपलाइन पर उठे सवाल सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता प्रभात यादव ने बताया कि शहर की अधिकांश पेयजल पाइपलाइन 40 से 50 वर्ष पुरानी हैं और कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके बावजूद उन्हें बदलने या मरम्मत करने के लिए न तो कोई ठोस योजना बनाई गई और न ही डीपीआर तैयार की गई। भास्कर ने उठाया था काले और बदबूदार पानी का मुद्दा गौरतलब है कि इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद दैनिक भास्कर ने जबलपुर के राजीव गांधी वार्ड में नलों से काला और दुर्गंधयुक्त पानी आने का मामला प्रमुखता से उठाया था। स्थानीय लोगों का आरोप था कि पेयजल पाइपलाइन नाले के भीतर से गुजर रही है। पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण नाले का गंदा पानी पेयजल में मिलकर घरों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ये खबर भी पढ़िए… जबलपुर में नलों से आया काला और बदबूदार पानी इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब जबलपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र के राजीव गांधी वार्ड में बुधवार सुबह लोगों के घरों में नलों से काला और दुर्गंधयुक्त पानी आया। स्थानीय लोगों ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की तत्काल जांच और समाधान की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर…
