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आंगनवाड़ी भर्ती में गड़बड़ी:फर्जी मार्कशीट और बीपीएल के बोनस अंक से मेरिट में बनाई जगह

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती…4 जिलों की पड़ताल प्रदेश के 4 से ज्यादा जिलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की भर्ती में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है। नौकरी पाने किसी ने खुद को गरीबी रेखा के नीचे बता दिया तो किसी विवाहित ने खुद को अविवाहित बता डाला। सिर्फ इतना ही नहीं मार्कशीट, बीपीएल कार्ड सहित कई फर्जी दस्तावेज भी लगाए गए हैं। भास्कर ने रतलाम, मंदसौर, दतिया, टीकमगढ़ और नीमच जिलों में पड़ताल की। यहां एक जैसा पैटर्न सामने आया है। या तो दस्तावेज फर्जी लगाए गए हैं या फिर झूठी जानकारी देकर अतिरिक्त अंक हासिल किए और मेरिट में पहले नंबर पर आ गए। हैरानी यह कि शिकायतों के बाद भी इन पर कार्रवाई नहीं हुई और नियुक्तियां जारी रहीं। प्रदेश में कई जिलों में नियुक्तियों के एवज में रिश्वत लेते विभाग के अधिकारी रंगेहाथ पकड़े भी जा चुके हैं। मप्र में महिला एवं बाल विकास विभाग ने वर्ष 2025 में करीब 19,504 और वर्ष 2026 में पहले चरण में 2,548 पदों के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इन दोनों ही साल की नियुक्तियां संदेह के घेरे में हैं। सिर्फ टीकमगढ़ में ही फर्जी मार्कशीटों को लेकर 109 शिकायतें विभाग के पास पहुंचीं। फिलहाल अफसर कुछ कहने से बच रहे हैं। मंदसौर डीपीओ अंकिता पंड्या ने बताया पिछली नियुक्तियों में 11 प्रकरण संदिग्ध थे। रतलाम डीपीओ सुभाष जैन चयन और सत्यापन की प्रक्रिया विकासखंड स्तर से होने की बात कह रहे हैं। ऐसे होती है भर्ती… और गड़बड़ी
ऑनलाइन आवेदन: अमान्य/फर्जी बोर्ड की अंकसूची शुरुआती स्तर पर पोर्टल नहीं पकड़ पाता। प्रोविजनल मेरिट: कुछ मामलों में ऑनलाइन सूची की जानकारी छिपाने के आरोप हैं। भौतिक सत्यापन: सीडीपीओ और एसडीएम की समिति मूल दस्तावेजों का मिलान करती है। यहीं फर्जी मार्कशीट, बीपीएल व अन्य दस्तावेजों की खामियां पकड़ने में चूक हुई। 7 दिन में ऑनलाइन आपत्ति: जानकारी समय पर नहीं मिलने पर मौका सीमित हो जाता है। अंतिम चयन: जिपं सीईओ की समिति आपत्तियों का निराकरण कर अंतिम सूची जारी करती है। ऐसे अभ्यर्थी… खुद को बताया अविवाहित जबकि फोटो में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र आलोट: फर्जी BPL के अंक देकर चहेती को दी नियुक्ति ये हुआ : भूतिया केंद्र की सहायिका की ऑनलाइन मेरिट लिस्ट में निकिता प्रजापत 65.52 अंक के साथ पहले स्थान पर थीं। 7 मार्च को बिना तारीख की ऑफलाइन सूची ोजारी की गई। इसमें सपना परमार को BPL के 5 अंक देकर 68.1 अंक के साथ पहले नंबर पर कर दिया गया।
हकीकत : पंचायत ने लिखित में माना कि सपना का नाम BPL सूची में दर्ज ही नहीं है। बावजूद निकिता की आपत्ति को दरकिनार कर सपना को जॉइनिंग दे दी गई। मामला अब कलेक्टर कोर्ट में लंबित है। सीतामऊ: ब्लैक लिस्टेड संस्थान की मार्कशीट लगाकर मेरिट पाई
ये हुआ : सालरिया निवासी पुष्पा की शिकायत के अनुसार अनीता ने 2021 में MP बोर्ड से नियमित परीक्षा देकर 50% अंक हासिल किए। इसी वर्ष की सूरतगढ़ (राज.) संस्थान से 95% अंक वाली दूसरी मार्कशीट लगाई व कार्यकर्ता पद की नौकरी के लिए इस्तेमाल किया।
हकीकत : खड़धामनिया और सालरिया (सीतामऊ), दोनों मामलों में सूरतगढ़ संस्थान की अंकसूचियों में 95% अंक दर्ज हैं। एक ही वर्ष में दोहरी मार्कशीट के जरिए मेरिट में बढ़त हासिल करने का आरोप है। सुवासरा: ब्लैक लिस्टेड बोर्ड की डिग्री से छीना हक, ये भी मेरिट में
ये हुआ : सहायिका पद के लिए खड़धामनिया निवासी सोना शर्मा की जगह सपना नाम की अभ्यर्थी को मेरिट में पहला स्थान मिला। सपना ने भी ‘मुक्त विद्यालय शिक्षा परिषद, राजस्थान, सूरतगढ़’ की 95 फीसदी की मार्कशीट लगाई थी। आपत्ति के बाद भी निराकरण नहीं हुआ।
हकीकत : NIOS की आधिकारिक सूची के अनुसार यह बोर्ड फर्जी/ब्लैकलिस्टेड बताया गया है। डेढ़ साल बाद भी अफसरों ने निर्णय नहीं लिया। पात्र आवेदक कार्यालयों के चक्कर काट रही है। क्षेत्र में ऐसे कई आवेदक परेशान हैं। ये हैं जिम्मेदार : मोनिका शुक्ला, सीडीपीओ-आलोट
बोलीं : जिला स्तर से ही प्रक्रिया हुई। मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। ये हैं जिम्मेदार : रमेश आर्य, सीडीपीओ-​सीतामऊ विकासखंड
बोले : ऐसा कुछ नहीं, आपत्तियों व शिकायतों की जांच कर जिला
स्तर से निराकरण होगा।
जबकि सीडीपीओ ही दस्तावेजों के सत्यापन की पहली कड़ी है। इसी स्तर से गड़बड़ी पकड़ ली जाती तो अपात्र मेरिट सूची तक ही नहीं पहुंचते। दतिया: मंगलसूत्र-सिंदूर, फिर भी अविवाहित
ये हुआ : शहर के वार्ड-2 में बबीता रायकवार ने आवेदन (2025) में खुद को ‘अविवाहित’ बताया जिससे 5 बोनस अंक मिले और वे मेरिट में पहले स्थान पर पहुंचीं और सहायिका की नौकरी ले ली।
हकीकत : आवेदन के साथ लगी फोटो में सिंदूर और मंगलसूत्र दिखाई दे रहा है। बावजूद भौतिक सत्यापन के दौरान इस पर आपत्ति नहीं ली गई। मलखानपुर: ‘फर्जी बोर्ड’ की मार्कशीट से नियुक्ति
ये हुआ : निशा दांगी ने ‘महर्षि वाल्मीकि संस्कृत एवं योग शिक्षा संस्थान (उ.प्र.)’ की अंकसूची लगाकर आवेदन (2025) किया।
हकीकत : जांच में इस संस्थान की अंकसूचियों को अमान्य और फर्जी पाया जा चुका है। बावजूद अंकसूची को मान्य मानकर सहायिका पद पर निशा को पहली वरीयता दी गई और नियुक्ति दे दी गई। निर्मला भूरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री से सीधी बात- आप तो फर्जी मामले बताइए, हम उनकी जांच करवाएंगे
भास्कर : फर्जी मार्कशीट और दस्तावेजों से नौकरियां पाने के मामले सामने आ रहे हैं। इस पर रोक क्यों नहीं लग पा रही?
जवाब : “ऐसे मामले बताइए, हम जांच करवाएंगे। जिसे दस्तावेज फर्जी लगते हैं, वह शिकायत करे।”
भास्कर : पकड़े जाने पर विभाग सिर्फ नियुक्ति निरस्त करके फाइल बंद कर देता है, कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं होती?
जवाब : ऐसा नहीं है। कई जगह सख्त कार्रवाई करवा रहे हैं। जहां से शिकायत मिलेगी, कार्रवाई होगी।
भास्कर : फर्जी दस्तावेज कहां से बन रहे हैं और कौन बना रहा है? इस पूरे नेटवर्क की ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग में विभाग विफल क्यों है?
जवाब : कौन बना रहा है और कहां से बन रहे हैं, मॉनिटरिंग जरूरी है। हम इस ओर ध्यान दिलाएंगे और शिकायत मिलने पर कार्रवाई कराएंगे।

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